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केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ राज्य की वायु प्रदूषण कार्य योजना की समीक्षा की

Updated on: 19 September, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

विनोद  नाथ यति

 

*केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने एनसीआर में वायु प्रदूषण को समयबद्ध तरीके से रोकने के लिए नियमों के कड़ाई से पालन, तेजी से अमल और पूरे समाज को साथ लेकर चलने के नजरिए पर बल दिया*

केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से चल रहे उपायों की प्रगति का आकलन करने के लिए एक विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान केन्द्रीय मंत्री ने सर्दियों के मौसम के शुरू होने से पहले प्रदूषण के स्तर में काफी कमी लाने के लिए तेजी से काम करने, अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और नियमों को सख्ती से लागू करने की ज़रूरत पर बल दिया। बैठक में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह, उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ अरुण कुमार तथा प्रदेश के परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह भी मौजूद थे। बैठक को संबोधित करते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये सरकार द्वारा किये गये प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने राज्य सरकार के सभी संबंधित अधिकारियों को बैठक में चर्चा किये गये विभिन्न उपायों पर समयबद्ध तरीके से कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को इस बैठक के आयोजन तथा उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया।

समय पर कार्रवाई की महत्ता बताते हुए श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सर्दियों के मौसम से पहले के समय का पूरा इस्तेमाल करके प्रदूषण रोकने के उपायों को मिशन मोड में लागू किया जाना चाहिए। दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए समय पर काम पूरा करना, बेहतर तालमेल और सख्ती से नियमों को लागू करना बहुत जरूरी है।

सड़कों की धूल को कम करने के उपायों की समीक्षा करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मॉनसून के दौरान सड़कों को दुरुस्त करने और स्थानीय किस्म की झाड़ियों/घास लगाकर हरियाली बढ़ाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। साथ ही, गड्ढों की पहचान और मरम्मत, फुटपाथ व पैदल चलने के रास्ते बनाने, सड़क के किनारे हरियाली लगाने और सड़कों की अच्छी तरह से सफाई करने पर खास ध्यान दिया जाए।

श्री यादव ने कहा कि मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) को तैनात करने में जो भी कमियां हैं, उन्हें यथाशीघ्र दूर कर लिया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी एमआरएसएम को जियो-टैग किया जाए ताकि सड़क की सफाई के काम की रियल-टाइम निगरानी हो सके और जवाबदेही बेहतर हो सके।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की स्थिति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में एनसीआर में इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करने का काम तेजी से किया जाना चाहिए, क्योंकि मौजूदा बेड़े में काफी कमियां हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रदेश में ऐतिहासिक वृक्षारोपण कार्य को संपन्न किये जाने के लिये बधाई दी।  

इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुकी गाड़ियों (ईओएल) के मामले पर श्री यादव ने अधिकारियों से एनसीआर के बाहर योग्य ईओएल वाहनों के हस्तांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में तेजी लाने का अनुरोध किया, साथ ही साथ पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप करने को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने 'परिवर्तन योजना' के तहत पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से तेजी से बदलने की भी मांग की।

मंत्री ने अनुरोध किया कि 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' पहल के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी ईंधन स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएं। शहरी ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए श्री यादव ने अधिकारियों से कहा कि वे मिशन मोड में ट्रैफिक जाम वाले हॉटस्पॉट की पहचान करें और जल्द से जल्द उन्हें ठीक करने के लिए ज़रूरी उपाय लागू करें।

औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा करते हुए श्री यादव ने औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (एपीसीडी) की स्थापना में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मंत्री ने निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) कचरा प्रबंधन की प्रगति की समीक्षा की और निर्देश दिया कि सीएंडडी कचरे के लिए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित करने के काम में तेजी लाई जाए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि पुराने कचरे को हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए। नगरपालिका के ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) और बायोमास जलाने की समस्या का जिक्र करते हुए श्री यादव ने इसके लिए खास टास्क फोर्स बनाने की बात कही। 

पराली जलाने के मुद्दे पर श्री यादव ने राज्य सरकार से फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी की कमियों को दूर करने और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने सीआरएम उपकरणों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के लिए गहन सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियानों और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने सुझाव दिया कि स्थानीय चुने हुए प्रतिनिधि ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट की पहचान करें। उन्होंने जिला कलेक्टरों से यह भी अनुरोध किया कि वे औद्योगिक इकाइयों का सर्वेक्षण करें और मांग-आपूर्ति के कुशल प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने के लिए फसल अवशेषों के भंडारण और खपत की उनकी क्षमताओं का दस्तावेजीकरण करें। राज्य के अधिकारियों को यह भी सलाह दी गई कि वे फसल अवशेषों को बांधने वाली मशीनों (बेलर) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। जनभागीदारी और संस्थाओं के बीच आपसी तालमेल के साथ काम करने की अहमियत बताते हुए श्री यादव ने कहा कि वायु प्रदूषण से असरदार ढंग से तभी निपटा जा सकता है जब 'पूरी सरकार' और 'पूरा समाज' मिलकर काम करें। केंद्रीय मंत्री ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों को शक्ति से लागू करवाने पर जोर दिया। उन्होंने सफाई कर्मियों की संख्या को जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाने पर भी बल दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा की वायु प्रदूषण नियमों का अनुपालन करके, वेतन तकनीक के प्रयोग तथा नवाचार के प्रयोग से वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।

इस बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव; वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इसके साथ ही यहां सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यू.पी. एसपीसीबी) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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