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किसान भाई पोर्टल पर बुकिंग कर प्राप्त करें‌ अनुदानित बीज--सूर्य प्रताप शाही

Updated on: 13 June, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी -- प्रदेश में इस वर्ष 110 लाख हेक्टेयर में खरीद की फसलों की बुवाई होनी है। इसमें से धान 69 लाख हेक्टेयर, मक्का 5.58 लाख हेक्टेयर, ज्वार 3.20 लाख हेक्टेयर, बाजरा 9.75 लाख हेक्टेयर, दलहन 11.69 लाख हेक्टेयर,तिलहन10.80 लाख हेक्टेयर, श्रीअन्न 42,000 हेक्टेयर एवं कपास 20,000 हेक्टर में बुवाई होना है। उक्त बातें उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान विभाग के मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बुधवार को सर्किट हाउस की सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही। उन्होंने बताया कि इसके लिए 1,96,000 कुंतल बीज जिसमें धान के साथ दलहनी, तिलहनी तथा श्रीअन्न का बीज तथा हरी खाद हेतु 28000 कुंतल ढैंचा का बीज अनुदान पर दिया जा रहा है। इसी के साथ दलहन तिलहन एवं श्रीअन्न के 5,62,000 बीज मिनीकिट निशुल्क दिए जा रहे हैं। इस बार सुपर अलनीनो के प्रकोप को देखते हुए आत्मनिर्भरता मिशन इन पल्सेस के अंतर्गत दलहनी फसलों को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही साथ तिलहनी एवं श्रीअन्न के फसलों के क्षेत्रफल को बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया जा रहा है। जिसके अंतर्गत 40हजार कुंतल मूंगफली का बीज अनुदान पर किसानों को दिया जा रहा है। सभी कृषकों को समान अवसर दिए जाने के उद्देश्य तथा बीज वितरण में पूरी पारदर्शिता लाने हेतु इस बार कृषि विभाग से मिलने वाले सभी बीज ऑनलाइन बुकिंग कराते हुए ई- लॉटरी के माध्यम से दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में सभी किसान भाइयों से मेरी अपील है कि जिन फसलों की बुवाई आपको करनी है वर्तमान में विभाग के पोर्टल (https://agriculture.up.gov.in)पर बुकिंग करते हुए समय से अनुदान पर बीज प्राप्त कर योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं, जिससे खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश में आज की तिथि में 14.84 लाख मैट्रिक टन यूरिया (सहकारिता के क्षेत्र में 5.83 लाख मैट्रिक टन एवं नीजी क्षेत्र में 9 लाख मैट्रिक टन),5.11 लाख मैट्रिक टन डीएपी(सहकारिता के क्षेत्र में 2.9 लाख मैट्रिक टन एवं नीजी क्षेत्र में 2.2 लाख मैट्रिक टन),4.81 लाख मैट्रिक टन एनपीके(सहकारिता के क्षेत्र में 1.6 लाख मैट्रिक टन एवं नीजी क्षेत्र में 3.2 लाख मैट्रिक टन) मुख्य उर्वरक है। इसी के साथ 1.03 लाख मैट्रिक टन एमओपी एवं 4.0 2 लाख मैट्रिक टन एसएसपी उर्बरक उपलब्ध है। इस प्रकार कुल 29.81 लाख मैट्रिक टन अनुदानित उर्वरक प्रदेश में उपलब्ध है। किसी भी क्षेत्र में उर्वरकों की कमी नहीं है। मृदा एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य को बनाए रखने हेतु संतुलित उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे मिट्टी के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य बना रहे। विश्व बैंक की सहायता से उत्तर प्रदेश के 28 जनपदों में 5 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश एग्रीज योजना संचालित कराई जा रही है। इस परियोजना का बजट परिव्यय लगभग चार हजार करोड़ रुपए है। यह योजना उत्तर प्रदेश के आठ मंडल एवं 28 जनपदों जैसे- झांसी, जालौन, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती एवं बलरामपुर में संचालित है। योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के आठ मंडल 28 जनपदों के 123 विकासखण्डो के कुल 3667 ग्राम पंचायतों में चयनित क्लस्टरों के रूप में कृषि कार्य कराया जा रहा है। योजना के अंतर्गत ढैंचा 34155 कुंतल, हरी खाद किट 257320 (पैकेट में), धान 16047 कुंतल, बाजरा 407 कुंतल, मक्का 2037 कुंतल, ज्वार 496 कुंतल,उर्द 1259,अरहर 905 कुंतल,तिल 458 कुंतल एवं मूंगफली 3770कुंतल बीज नि:शुल्क दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत चयनित कृषकों को उन्नत प्रजाति के बीज क्षेत्रीय मांग के अनुसार समय से उपलब्ध कराया जा रहा है।सीमांत एवं लघु कृषकों को (अधिकतम दो हेक्टेयर तक) नि:शुल्क कृषि निवेश उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के अंतर्गत कृषि निवेश में बीज माइक्रो न्यूट्रिएंट एवं फसल सुरक्षा रसायन (पेस्टिसाइड) नि:शुल्क चयनित क्लस्टर के कृषकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।इसी के साथ मृदा सुधार के लिए ढैंचा एवं हरी खाद के किट का नि:शुल्क वितरण तथा मृदा परीक्षण परिणाम (12 पैरामीटर) नि:शुल्क चयनित क्लस्टर के कृषकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। उक्त योजना का मुख्य उद्देश्य जैसे कृषि संसाधनों का समुचित उपयोग, बाजार मानकों के अनुरूप गुणवत्ता में सुधार करना, डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफार्म उपलब्ध कराना, चुनिंदा कृषि उत्पादों को उत्कृष्टता केन्द्र के रूप में विकसित करना, कृषि बाजार श्रृंखला की कमियों को दूर करना, नई तकनीकी एवं उपयुक्त बाजार के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित कराना 

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