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बहराइच–जरवल रोड नई रेल लाइन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार, पूर्वी यूपी की कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

Updated on: 28 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

*उत्तर प्रदेश में रेल विकास का सुनहरा दौर, 49 परियोजनाएं स्वीकृत, 62,360 करोड़ की लागत से 3,807 किमी नेटवर्क विस्तार*

नई दिल्ली/लखनऊ, 3 दिसंबर:

बहराइच–जरवल रोड के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन को लेकर एक बड़ी प्रगति सामने आई है। केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को लोक सभा में बहराइच-जरवर रोड नई रेललाइन के सम्बन्ध में पूछे गये सवाल के जवाब में बताया कि 70 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बहराइच और जरवल रोड गोंडा जंक्शन के माध्यम से रेल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, लेकिन नई सीधी रेल लाइन के निर्माण से इस क्षेत्र को तेज, सुगम और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा समय घटेगा और क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक व औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

केन्द्रीय रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि डीपीआर तैयार होने के बाद अब इस परियोजना को स्वीकृति दिलाने के लिए राज्य सरकार सहित विभिन्न संबंधित विभागों से परामर्श, नीति आयोग की समीक्षा तथा वित्त मंत्रालय की मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में रेल संपर्क को और सुदृढ़ करने के लिए कई अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें बुढ़वल–जरवल रोड–गोंडा कचहरी चौथी लाइन (56 किमी), बुढ़वल–जरवल रोड–गोंडा तीसरी लाइन (62 किमी), बाराबंकी–बुढ़वल तीसरी लाइन (27 किमी) और बहराइच–खलीलाबाद 240 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन प्रमुख हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में रेल विकास का स्वर्णिम दौर चल रहा है, जहां अब तक 49 रेल परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं पर कुल 62,360 करोड़ रुपये की लागत से 3,807 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, जिससे राज्य में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत आधार मिल रहा है और यात्रियों को तेज, सुरक्षित व सुविधाजनक यात्रा की सुविधा उपलब्ध हो रही है।

सरकार ने यह भी बताया कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश में रेलवे के बजट आवंटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2009 से 2014 के बीच रेल परियोजनाओं के लिए औसतन 1,109 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का आवंटन किया जाता था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 19,858 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 18 गुना वृद्धि को दर्शाता है।

रेल मंत्री ने बताया कि 2009-14 की अवधि में प्रदेश में 996 किलोमीटर नई रेल लाइनों की कमीशनिंग हुई थी, जबकि वर्ष 2014-25 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 5,272 किलोमीटर तक पहुंच गया है। इस दौरान प्रति वर्ष औसतन 479 किलोमीटर नई रेल लाइन शुरू की गई, जो पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।

1 अप्रैल 2025 तक उत्तर प्रदेश में कुल 49 रेल परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी कुल लंबाई 3,807 किलोमीटर और अनुमानित लागत 62,360 करोड़ रुपये है। इनमें से 1,323 किलोमीटर रेल लाइन का कार्य पूरा होकर परिचालन शुरू हो चुका है और अब तक 30,611 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।

रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी रेल परियोजना की मंजूरी और उसके पूर्ण होने में भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, विभिन्न कानूनी अनुमतियां, क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, कानून व्यवस्था और उपलब्ध निधियों जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन कारणों से परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा प्रभावित होती है।

बहराइच–जरवल रोड नई रेल लाइन की डीपीआर तैयार हो जाने से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को अब नई गति मिली है। इसके पूर्ण होने पर पूर्वी उत्तर प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत आधार मिलेगा और आम जनता को तेज, सुरक्षित व सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।

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