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नेत्रदान से चार ज़िंदगियों में उजाला वाराणसी के डॉ. अनुराग टंडन का प्रेरणादायक संकल्प

Updated on: 13 June, 2026

डाटा पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी। समाज सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लायंस आई बैंक के सचिव,इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं डॉ टंडन नर्सिंग होम के निदेशक डॉ. अनुराग टंडन ने एक विशेष बातचीत में मानव सेवा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को साझा किया। वे नेत्र एवं रेटिना विशेषज्ञ के रूप में वर्षों से गरीब और असहाय मरीजों को निशुल्क उपचार प्रदान करते आ रहे हैं। डॉ. टंडन ने बताया कि उनके संस्थान में जरूरतमंद मरीजों के लिए मोतियाबिंद ऑपरेशन से लेकर दवाइयों और चश्मे तक की संपूर्ण सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। उनका उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति की रोशनी छीनने का कारण न बने। हाल ही में हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर एक भावुक क्षण के दौरान नेत्रदान का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। वाराणसी निवासी राहुल जैन ने अपने 57 वर्षीय चचेरे भाई विपिन कुमार जैन के निधन के बाद नेत्रदान का निर्णय लिया। समय रहते पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली गई, जिससे चार लोगों को नई दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी। डॉ. टंडन ने बताया कि मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्रदान संभव होता है और इसमें पूरी आंख नहीं निकाली जाती,बल्कि केवल ऊपरी परत (कॉर्निया) को प्रत्यारोपित किया जाता है। एक व्यक्ति का नेत्रदान चार लोगों के जीवन में रोशनी ला सकता है। राहुल जैन इससे पहले भी अपने पिता सहित कई लोगों का नेत्रदान करवा चुके हैं और समाज में इस पुनीत कार्य के प्रति लगातार जागरूकता फैला रहे हैं। यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरी है। डॉ. टंडन ने अपने 33 वर्षों के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पंजाबी अस्पताल में निरंतर निःशुल्क सेवा दी है। उनके लिए हर मरीज समान है—चाहे वह अमीर हो या गरीब। सभी को उच्च गुणवत्ता वाले मल्टीफोकल लेंस लगाए जाते हैं ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने समाज से अपील की कि नेत्रदान जैसे महान कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें,ताकि किसी और के जीवन में उजाला लाया जा सके।

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