संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी। राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, अतर्रा-बांदा की वर्तमान प्राचार्या प्रो. सुमन यादव के रीडर पद पर चयन एवं पूर्व में प्रस्तुत किए गए कार्य-अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर अधिवक्ता दीपक कुमार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। अधिवक्ता दीपक कुमार का आरोप है कि वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा प्रो. सुमन यादव का चयन रीडर, शल्य तंत्र के पद पर किया गया था। उनके अनुसार, चयन के समय प्रस्तुत किए गए कार्य-अनुभव प्रमाण-पत्रों की वैधता एवं रीडर पद के निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की जांच आवश्यक है। दीपक कुमार के मुताबिक, वर्ष 2009 में प्रो. सुमन यादव ने श्री रणवीर संस्कृत विद्यालय,कमच्छा,वाराणसी में सहायक अध्यापिका (टीजीटी आयुर्वेद) के पद पर अपना धारणाधिकार सुरक्षित रखते हुए राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में शल्य तंत्र विभाग के प्रवक्ता पद पर 13 अक्टूबर 2009 से 12 अक्टूबर 2012 तक कार्य किया। उनका दावा है कि वर्ष 2013 में रीडर पद पर चयन के दौरान 14 जुलाई 2006 से 12 अक्टूबर 2009 तक उक्त विद्यालय में सहायक अध्यापिका (टीजीटी आयुर्वेद) के रूप में कार्य करने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि टीजीटी (आयुर्वेद) के पद की मान्यता और उक्त अनुभव की रीडर पद के लिए निर्धारित अर्हताओं में स्वीकार्यता की स्पष्ट जांच नहीं की गई। उन्होंने संबंधित प्रमाण-पत्रों, नियुक्ति अभिलेखों तथा सेवा विवरण की सक्षम स्तर से सत्यापन कराने की मांग की है। दीपक कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में प्रो. सुमन यादव को विभागीय प्रोन्नति के माध्यम से प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिली और वर्तमान में वह प्राचार्या के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यदि रीडर पद पर चयन के समय प्रस्तुत अनुभव की वैधता को लेकर कोई अनियमितता है तो उसके आधार पर हुई subsequent पदोन्नतियों और नियुक्तियों की भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए। शिकायतकर्ता के अनुसार,मामले की जांच के लिए प्रो. डी.के. मौर्य तथा प्रो. माखन लाल को नामित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया। हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित जांच अधिकारियों अथवा प्रो. सुमन यादव का पक्ष इस प्रस्तुति में उपलब्ध नहीं है।दीपक कुमार का कहना है कि 27 जुलाई 2026 को उन्हें जांच से संबंधित दस्तावेज एवं साक्ष्य लेकर उपस्थित होने के लिए बुलाया गया था। उनका आरोप है कि उस दौरान उनकी ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों पर उनसे पर्याप्त पूछताछ किए बिना ही जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने शासन एवं संबंधित सक्षम अधिकारियों से मांग की है कि प्रो. सुमन यादव के रीडर पद पर चयन के समय प्रस्तुत कार्य-अनुभव प्रमाण-पत्रों की वैधता,संबंधित संस्थान की मान्यता,सेवा अवधि तथा चयन नियमों के अनुरूप उनकी पात्रता की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही,यदि जांच में कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।