संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल (BCUP) के प्रतिनिधि पद से हटाया गया था। यह आदेश BCI द्वारा 28 अप्रैल 2025 को पारित किया गया था।
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्राथमिक दृष्टि से BCI ने अपनी ही अधिसूचना दिनांक 14 अगस्त 2020 और निर्धारित प्रक्रिया की पूरी तरह अनदेखी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना कारण बताओ नोटिस, बिना जांच और बिना सुनवाई का अवसर दिए, हटाया जाना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
याचिका अधिवक्ता आकाश धर दुबे द्वारा तैयार व दाखिल किया गया था|
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि BCI ने BCUP द्वारा 18 जनवरी 2025 को पारित अविश्वास प्रस्ताव के आधार पर श्री त्रिपाठी को हटाया, जबकि BCI नियमों के अनुसार ऐसा प्रस्ताव केवल BCI स्वयं ही ला सकती है, न कि कोई राज्य बार काउंसिल।
याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि यह कार्रवाई पूर्वनियोजित राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है, क्योंकि उन्होंने BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ आगामी चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।
अदालत ने पाया कि उपरोक्त किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और इसे BCI के वकील ने भी विवादित नहीं किया। अतः अदालत ने 28.04.2025 के आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 8 सितंबर 2025 को तय की है।और माननीय हाईकोर्ट दिल्ली के आदेशानुसार श्रीनाथ त्रिपाठी BCI के पद बने रहेंगे