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राधा -कृष्ण मंदिर रामेश्वर के महंत का निधन,अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

Updated on: 13 June, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

अतुल राय 

 

रामेश्वर,वाराणसी। पंचकोशी के तीसरे पड़ाव तीर्थ धाम में स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के महंत 1008 श्री राममूर्ति दास उर्फ मद्रासी बाबा उम्र 80 वर्ष का आज मंगलवार को इलाज के दौरान बीएचयू में निधन हो गया।सिद्धपीठ राधा -कृष्ण मन्दिर के महंत के निधन की सूचना पर क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। मन्दिर में ग्रामीणों व भक्तों की भारी भीड़ उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ी।रामेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी आचार्य अनूप तिवारी के अनुसार महंत जी आंध्र प्रदेश के नेल्लूर जिला के मूल निवासी थे। बीएचयू में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त की। अचानक पंचकोशी यात्रा महात्म्य से प्रभावित होकर विरक्ति लेकर रामेश्वर तीर्थ धाम के कई मंदिरों व गुफा सहित वट बृक्ष के नीचे वर्ष 1978 से वर्ष 84 तक कठिन तपस्या की। इस बीच अपने गुरु 1008 श्री बाबा विश्वम्भर दास जी के सानिध्य में रहकर मन्दिर पूजन आरती व सेवा का कार्य किया। वर्ष 84 में उनके गुरु के निधन पर क्षेत्र के साधु -संतों व गृहस्तों ने मिलकर गद्दी पर आसीन कर महंत की जिम्मेदारी सौंप दी।तब से आज तक सेवारत रहे।राममूर्ति दास उर्फ मद्रासी बाबा अंग्रेजी,तेलुगु,हिंदी व संस्कृत भाषा व कर्मकांड के विद्वान रहे। उनकी भबिष्य वाणी कभी व्यर्थ नहीं गई। देश भर का भ्रमण कर सनातन धर्म के प्रसार के लिए कार्य करते रहे। अयोध्या राममंदिर में भगवान को टेंट में रहने का दुःख था। रामेश्वर मन्दिर से एक ईंट लेकर अयोध्या पहुंचकर वहाँ पूजन करने गए इस बीच सुरक्षा गार्ड ने पकड़ लिया और घसीटकर ले जाने लगे तो 5 अंजुली मिट्टी देकर यातना सहते रामेश्वर मन्दिर लौटे थे।पूर्वांचल का कोई भी जिला व गाँव नहीं बचा रहा जहां महंत जी मंगल कार्यक्रमों में शरीक न हुए हो।दो दिन पूर्व सामान्य बीमारी पर भक्तजनों ने बीएचयू में इलाज के लिए भर्ती किया गया था। जहां इलाज के दौरान आज दोपहर बाद अंतिम सांस लेकर गोलोक महाप्रयाण कर गए।एम्बुलेंस से उनके पार्थिव शरीर को रामेश्वर मन्दिर अंतिम दर्शन हेतु लाया गया है।कल बुधवार को सविधि साधु-संतों व गृहस्थजनों के उपस्थिति में गंगा में प्रवाहित की जाएगी।

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