संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी। कॉग्निविया सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड होलिस्टिक वेलबीइंग द्वारा “पेरेंटिंग अक्रॉस Ages” विषय पर आयोजित पेरेंटिंग कार्यशाला ने अभिभावकों को बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से सुरक्षित और मजबूत रिश्ते बनाने की दिशा में नई सोच और व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इस कार्यशाला का सह-समर्थन पेरेंटिंग विथ स्नेहा द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन सृष्टि विश्वकर्मा ने किया,जबकि मुख्य वक्ता के रूप में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. पायल जायसवाल और काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट स्नेहा मिश्रा ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता से प्रतिभागियों को समृद्ध किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर डॉ. उषा वर्मा,असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिव्या सिंह एवं एसीपी विदुष सक्सेना की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. पायल जायसवाल ने कहा कि “रिश्ते केवल निभाए नहीं जाते,उन्हें हर उम्र के साथ समझना भी पड़ता है।” उन्होंने बताया कि बच्चों की भावनात्मक आवश्यकताएं समय के साथ बदलती हैं और अभिभावकों को अपनी पेरेंटिंग शैली में भी उसी अनुसार बदलाव करना चाहिए।कार्यशाला में बचपन,किशोरावस्था और युवावस्था के विभिन्न चरणों में बच्चों के साथ संवाद,सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव के महत्व पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही किशोरावस्था के भावनात्मक उतार-चढ़ाव, बढ़ते कम्युनिकेशन गैप,सोशल मीडिया के मनोवैज्ञानिक प्रभाव और युवाओं में बढ़ती भावनात्मक दूरी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बताया कि कठोर नियंत्रण की बजाय विश्वास,संवाद और भावनात्मक सहयोग अधिक प्रभावी पेरेंटिंग के आधार हैं। “कम कंट्रोल,ज्यादा कनेक्शन”, “इमोशनल वैलिडेशन” और “विश्वास आधारित संवाद” जैसे आधुनिक सिद्धांतों को अपनाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी,प्रेरणादायक और व्यवहारिक बताया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सकारात्मक पेरेंटिंग को बढ़ावा दिया जाता रहेगा,ताकि समाज में संवेदनशील,स्वस्थ और सशक्त पारिवारिक वातावरण का निर्माण हो सके।