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88वा धूमिल जयंती गाँव के माटी की सुगंध को प्रेरणादायी बनाने का कार्य किया धूमिल ने

Updated on: 23 July, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

अतुल राय 

वाराणसी। जनकवि सुदामा पांडेय 'धूमिल' के 88 वी जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आयुष एवम औषधि मंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्रा 'दयालु' व विशिष्ट अतिथि एमएलसी धर्मेंद्र राय ने धूमिल जी के मूर्ति पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।आयुष एवम औषधि मंत्री ने कहा कि काशी,बनारस कवियों,साहित्यकारों,नाटककारों से समृद्ध शहर एक चलचित्र की भांति सजी जीवंत नगरी है जहां की मिट्टी में अनेक विभूतियों ने जन्म लेकर इसे महान बनाया हम सब उनके ऋणी हैं,धूमिल जी उसी में से एक रत्न के रूप में पहचान बनाकर जन जन की आवाज बन गए।एमएलसी धर्मेंद्र राय ने कहा कि छल कपट से दूर रहने वाला व्यक्ति ही अपनी छवि बनाकर आम मानस के स्मृतियों में सम्मान पाता है। धूमिल जी ने यह यथार्थ साबित कर दिया कि वरुणा की कछार की मिट्टी में वह ऊर्जा है जो लोगों को नई जीवन का संदेश निरन्तर प्रेरणा देती रहेगी।धूमिल जयंती अवसर पर 'धूमिल की कविता-समय और समाज विषयक संगोष्ठी में धूमिल की पत्नी श्रीमती मूरत देवी ने कवि रामेश्वर त्रिपाठी द्वारा लिखित पुस्तक अग्नि पक्षी! एक दंश कथा का विमोचन किया।संगोष्ठी के मुख्य अतिथि शिवकुमार 'पराग'ने कहा कि धूमिल लोकतंत्र के बदलते समय के सजग प्रहरी रहे। उन्होंने अपने कविताओं के द्वारा एक दूसरे प्रजातन्त्र की तलाश में अपनी कविता को आम जन की आवाज में प्रकट करते रहे। गांव की माटी की सुगंध को प्रेरणादायी बनाने का कार्य धूमिल ने किया।विशिष्ट अतिथि व मुख्य वक्ता प्रो0गोरखनाथ पाण्डेय विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग यू0पी0 कालेज ने कहा कि गांव की असली संस्कृति धूमिल की कविताओं में दिखती है। धूमिल का काल विचार के संघर्षो का काल था।कवि गोष्ठी में कवि विपिन कुमार,विनय विस्वा,युवा कवि गोलेन्द्र पटेल,बुद्धदेव तिवारी,गणेश सिंह,प्रभाकर सिंह,ओमप्रकाश दुबे,सदानन्द सिंह,देवीशंकर सिंह,चंचल सिंह,ओमकार मिश्र,कृपाशंकर मिश्र,नन्दलाल मास्टर डॉ0 आर के सिंह,अशोक मिश्र ने कविता पाठ किया।रोहनियां विधायक डॉ0 सुनील पटेल ने कहा कि जनचेतना और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने वाले कवि धूमिल को आगे बढ़ाने का दायित्व जनप्रतिनिधियों के साथ आमजन की है।संगोष्ठी स्थल पर युवाओ ने नन्दलाल मास्टर व मनीष पटेल के नेतृत्व में बालिका सम्मान व पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रदर्शनी लगाई थी।अध्यक्षता करते हुए धूमिल के सहपाठी रामेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि धूमिल वर्तमान परिस्थितियों में समयानुसार अपने तेवर और प्रेम भरी गुर्राहट की कविताओं को लिखा करते थे। जनकवि धूमिल के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूलाधार उनके गांव खेवली की माटी है।धूमिल के ज्येष्ठ पुत्र रत्न शंकर पांडेय ने कहा कि -एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है,न रोटी खाता है वह सिर्फ रोटी से खेलता है। मैं पूछता हूँ वह तीसरा आदमी कौन है मेरे देश की संसद मौन है।अहम सवाल रोटी पर संसद किस तरह मौन रहती है इसे धूमिल ने अपनी कविताओं में बड़ी बेवाकी से कहा है। धूमिल ने अपनी बात रखने के लिए कविता को माध्यम बनाया ।वे जनवादी तेवर वाले महापुरुष रहे।जयंती समारोह में मंत्री,एमएलसी,विधायक,साहित्यकारों,कवियों,रचनाकारों के प्रति धूमिल के पुत्र रत्नशंकर पांडेय,आनन्द शंकर पांडेय,मोहन सिंह 'डब्ल्यू 'व अशोक पांडेय ने धन्यवाद सहित स्वागत कर आभार प्रकट किया।कुशल संचालन डॉ0 प्रभाकर सिंह ने किया।

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