संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
अतुल राय
वाराणसी। चोलापुर क्षेत्र महावीर मन्दिर के पास कथा के तीसरे दिन कथा वाचक श्री राजन जी महाराज अपने भक्तो को बताया कि ब्रह्म का कोई जन्म नही होता है।ब्रह्म अजर अमर और उसका कोई नाम नही होता है।यह सुन मा पार्वती प्रभु भोलेनाथ जी से प्रश्न करती है कि राम जी निराकार से साकार कैसे हों गये। उनको मानव अवतार लेने की क्या आवश्यकता पड़ी।उनका चरित्र वर्णन करने को कहा।उसी क्षण यह शब्द सुन शिव जी के मन मे पूरा प्रभु राम का चरित्र उत्तपन्न हो गया।मन ही मन प्रभु को प्रणाम किया और माता पार्वती को बताया कि प्रभु को जान लेने के बाद मानव परम् आनन्द को प्राप्त हो जाता है।उससे कली रूपी संसार छूट जाता है।वह यहाँ की सभी क्रियायों को भूल जाता है।उसे केवल ब्रह्म रूपी प्रभु राम ही चारो तरफ दिखाई देता है।जो मनुष्य प्रभु का गुणगान नही करता है वह पूरी जिंदगी भर मेढक की तरह हमेशा टर टर करता ही रहेगा।बाबा कहते है जैसे पानी का कोई आकार नही होता है।अगर वर्फ़ बन जाय तो उसका आकार बन जाता है।अगर भक्त कल्पना किया कि प्रभु बंशी लेकर आये तो भक्त के सामने प्रभु साकार रूपी बंशी के साथ दिखते है।जो जिस रूप में चाहता है प्रभु उसी रूप में दिखते है।बाबा कहते है किअगर भक्त को ज्ञान होता है तोप्रभु कि पीछे पीछे दौड़ते है अगर प्रेम होता है तो प्रभु भक्त के पीछे पीछे दौड़ते है। जी मामा मारीच बने हिरन को अगर प्रभु चाहते तो अपने स्थान से ही खड़े खड़े मार देते लेकिन उसका प्रभु के प्रति इतने प्रेम था कि प्रभु राम जी उसके पीछे पीछे दौड़ने लगे।यह प्रभु का प्रेम नही हो तो क्या है। प्रभु सर्वत्र है।आप जिस भाव मे प्रभु को हृदय से पुकारेंगे प्रभु उसी भाव से दौड़े दौड़े चले आएंगे।कथा सुनने वालों विशिष्ट जनों में श्रवण कुमार मिश्र,अर्चना मिश्रा,प्रेम यादव,ज्ञानेंद्र प्रकाश पांडेय,पुनीत मिश्र,राजन मिश्र,सबलू सिंह प्रधान,वीरेंद्र मिश्र,भैरव यादव,काफी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहें।