संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी। संतान के दीर्घायु, आरोग्य और सर्व कल्याण के लिए महिलाएं जीवित्पुत्रिका या जिउतिया निराजल व्रत रख आज पूजा अर्चना किया। जीउत वाहन की पूजा और कथा की परंपरा का भी निर्वहन किया।महिलाएं उड़द के साबूत दाने को निगलकर व्रत शुरू करती हैं। अन्न व जल कुछ भी ग्रहण नहीं करती। शाम को जग्गापट्टी के चौरा माता,सती माता,हिरमपुर के बाबू राम बाबा मंदिर,बरेमा पोखरा,हनुमान मंदिर,देहलीविनायक तालाब,हरिहरपुर,रामेश्वर महादेव मंदिर,खेवली,हरहुआ,चन्दापुर, बे लवरिया,आयर,मुर्दहा वीरापट्टी,चक्का,भटौली,गोकुलपुर सहित अन्य मंदिरों के पास विधि-विधान से पूजन हुआ।अगले दिन व्रत का पारण करेंगी,महिलाओं ने बताया कि धागे का गंडा बनाकर गंडे की विधिवत पूजा किया जाता है इसके बाद इसे गले में धारण करते है।यह रक्षासूत्र के रूप में पुत्र को भी गले में जिउतिया धारण करवाया जाता है।