संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी- ऋषि पंचमी पर पं.कमलापति त्रिपाठी जयंती की पांच दशक पुरानी समारोह परम्परा के जयंती समारोह को आज मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुये उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय राय ने कहा कि पंद्रह वर्ष की आयु में राजनीतिक जेल यात्री कमलापति त्रिपाठी संघर्ष की राजनीति के प्रतीक प्रेरणास्रोत थे। मुझे उनके बाद काशी के पहले व्यक्ति के रूप में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की कमान मिली है और उनकी वैचारिक विरासत के रस्ते पर चल कर उस दायित्व को निभाने के लिये मैं प्रतिबद्ध हूं।श्री राय ने कहाकि आज नफरत और द्वेष की जैसी राजनीति को उभार मिला है, उसके खतरों के प्रति त्रिपाठी जी ने तीन दशक पहले आगाह कर दिया था।उसके विरुद्ध अविचल भाव से संघर्ष करना काशी से जुड़ा उनका वैचारिक वारिस होने के कारण हम सबकी खास जिम्मेदारी है।त्रिपाठी जी सनातनी ईश्वरवादी और एक सेकुलर लोकतंत्रवादी राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी, जन सेवक जनप्रतिनिधि, पत्रकार और साहित्यकार थे। उनकी ऊंचाइयों को हम भले नहीं छू सकें, लेकिन उनके उनके मार्ग और सिद्धांतों पर चलने के लिये हर तरह के संघर्ष के लिये हम कटिबद्ध हैं।अध्यक्षीय सम्बोधन में काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष श्री अत्रि भारद्वाज ने कहाकि पंडित जी हमारे संघ के संस्थापक अध्यक्ष ही नहीं, पराड़कर जी की परम्परा के यशस्वी संपादक पत्रकार थे। हमें गौरव है कि उनकी विरासत एवं उनके प्रतिष्ठित शिष्यों के साथ पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। विशिष्ट अतिथि श्री राजेशपति त्रिपाठी ने कहाकि कमलापति त्रिपाठी कांग्रेस के उन सिद्धांतों को एकनिष्ठा और पूरी प्रतिबद्धता के साथ जीने की मिसाल थे, जिनकी बुनियाद पर आधुनिक भारत खड़ा हुआ। उनकी मशाल को उठाकर कांग्रेस और उसके माध्यम से प्रदेश एवं देश का काम करने का कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में जो दायित्व श्री अजय राय पर आया है, उस पर वह अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के गुणों के कारण सफल होंगे, यह एक मित्र के नाते हमारी शुभकामना है। स्वागत भाषण करते हुये जयन्ती समारोह समिति अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक श्री सतीश चौबे ने जहां समारोह की परम्परा पर प्रकाश डाला, वहीं त्रिपाठी जी के जयंती समारोह को कांग्रेस कमेटियों के माध्यम से पहली बार पूरे प्रदेश में विस्तार देने के लिये श्री अजय राय का आभार प्रकट किया।आरंभ में आज के समारोह में त्रिपाठी जी पर परिचर्चा विषय संस्थापना करते हुये प्रो.सतीश राय ने कहाकि भारतीय राजनीति में भावी खतरों पर अस्सी के दशक में कमलापति त्रिपाठी द्वारा आगाह करते हुये प्रस्तुत परामर्शों पर अमल हुआ होता, तो आज का इतिहास कुछ और रहा होता।समारोह में श्री विजय शंकर पाण्डेय एवं डा.प्रमोद पाण्डेय ने भी विचार रखे। श्री मनीष चौबे ने धन्यवाद ज्ञापन एवं विजय कृष्ण 'अन्नू' ने मंच संचालन किया। खजुरी में हुये समारोह के मंच एवं समागम में शामिल लोगों में उल्लेखनीय थे सर्वश्री अनिल श्रीवास्तव, राघवेन्द्र चौबे, राजेश्वर पटेल, प्रजानाथ शर्मा, प्रभू नारायण पाण्डेय, हरिशंकर सिंह, धीरेन्द्र नाथ शर्मा, रामजी गुप्ता, डा.एम.के.गुप्ता, शैलेन्द्र सिंह, बैजनाथ सिंह, प्रमोद चौबे, कमला राजभर, प्रदीप चौबे, रमजान अली, गुलशन अंसारी, अफरोज अहमद, दिलीप चौबे,वैभव त्रिपाठी, नीरज चौबे, आनन्द शुक्ला, नारायण मूर्ति ओझा, अजय कृष्ण, अशोक पाण्डेय, दुबे आदि। आरंभ में पं.कमलापति त्रिपाठी एवं समारोह संस्थापक स्व.याम प्रवेश चौबे के चित्रों पर पुष्पांजलि के साथ दीप जलाकर समारोह कि शुभारंभ हुआ। समारोह के पांच दशक पूर्ण होने पर एक समारोह कलेंडर का भी विमोचन किया गया।पंडित कमलापति त्रिपाठी जयंती समारोह के 50 वर्ष पूर्ण होने पर एक कैलेंडर भी जारी किया गया।