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किसानों की आत्मनिर्भरता का साधन है प्राकृतिक खेती

Updated on: 17 April, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

अतुल राय 

 

 सेवापुरी/वाराणसी। गौ आधा‌रित प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान अपनी आय को बढाकर,प्रकृति,पर्यावरण,मिट्टी व मानव स्वास्थ्य को ठीक कर सकते हैं।इतना ही नहीं बल्कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती किसानों की आत्मनिर्भरता की गारंटी है।उक्त बातें लोक भारती के राष्ट्रीय सम्पर्क प्रमुख एवं कृषक समृद्धि आयोग के सदस्य श्रीकृष्ण चौधरी ने सोमवार को सेवापुरी ब्लाक सभागार में प्राकृतिक खेती पर आधारित किसान गोष्ठी में किसानों को सम्बोधित करते हुए कही।उन्होंने कहा कि देशी गाय के गोबर,गौमूत्र के द्वारा जीवामृत,बीजामृत,घन जीवामृत व कीट नियंत्रक बनाकर किसान मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाकर अधिक उत्पादन ले सकते हैं।प्राकृतिक कृषि पद्धति से उत्पादित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पौष्टिकता एवं स्वाद अधिक होने के कारण बाजार में अधिक मूल्य भी प्राप्त हो रहा है।प्राकृतिक कृषि संगोष्ठी में पिंण्ड्रा के प्रगतिशील किसान हरिशंकर सिंह,ओमप्रकाश पटेल,सेवापूरी की सुमन देवी,वीरेंद्र सिंह,उदयभान सिंह,जयप्रकाश सिंह,प्रेम शंकर पटेल,अनूप द्विवेदी,रमाशंकर सिंह ने प्राकृतिक खेती से सम्बंधित अपना अनुभव बताया।इस दौरान सहायक विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह,बीटीएम देवमणि त्रिपाठी,लोक भारती से सेवापुरी ब्लॉक के संरक्षक रामआसरे सिंह,पूर्व एडीओ कृषि दिनेश प्रताप सिंह,मनोज बरनवाल,शैलेश कुमार,राहुल यादव,दीपक कुमार मौर्य,हिमांशु कुमार स्मिता राय,श्यामबिहारी मौर्य,संजय सिंह,ओम प्रकाश वर्मा,लक्ष्मण प्रसाद,बच्चलाल मौर्य आदि उपस्थित रहे।

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