संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी- सुबह ए बनारस आनन्द कानन का महत्वपूर्ण प्रकल्प " कलानिधि " के अंतर्गत अस्सी घाट पर भारतीय संस्कृति विशेषकर काशिकेय का दिग्दर्शन शास्त्र और लोक परंपरा को समाहित करते हुए संजोया गया। कलानिधि की परिकल्पना डॉ रत्नेश वर्मा की रही जिसमे सर्वप्रथम विदुषी संजीवनी के नेतृत्व में वैदिक मान्यता से संबंधित जिज्ञासा का सरस और बौद्धिक विश्लेषण किया गया जिसके अन्तर्गत सुश्री आरुषि, प्राची, शालिनी, सौम्या, श्रेया ,अनुष्का, ह्व्या, मनस्विनी द्वारा वेद सम्मत जैसे गूढ़ विषय पर असली अर्थ पर चर्चा की गई । सांध्यकालीन यज्ञ और संगीत के माध्यम से भारतीय मनीषा के प्रतीक चंद्रमा को समर्पित आयोजन में अनुष्ठानिक रूप से आहुतियां और सांगीतिक प्रस्तुतियां संपन्न हुई।सर्वप्रथम डॉक्टर श्रावणी विश्वास द्वारा सितार वादन की अद्भुत प्रस्तुति प्रस्तुत किया।संगत कार कलाकार के रूप में तबले पर श्री ज्ञान स्वरूप मुखर्जी, तानपुरा पर श्री यश सोनकर उपस्थित रहे।चंद्रमा मनसो जायते को चरितार्थ करते हुए भरतनाट्यम शैली में मनोहारी नृत्य की प्रस्तुति श्रीमती माला और प्रेमचंद होम्बल के निर्देशन में संपन्न हुआ। श्रीमती नागरंजीता, सुश्री रूपम रघुवंशी, जाह्नवी ,जागृति दवे ने कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश स्तुति तत्पश्चात विष्णु स्तुति, तोड़य मंगलम, आनन्द तांडव समापन परस तिल्लाना प्रस्तुत कर दर्शकों को बाकी चितवन एवं लास्य भरे सौंदर्य के माध्यम से मंत्र मुग्ध किया। समस्त कलाकारों को प्रमाण पत्र पद्मश्री डॉ सरोज चूड़ामणि ,श्रीमती मंजू मिश्रा, नीलम सिंह, डॉ पूर्णिमा मिश्रा, डॉ माधवी, स्नेह लता ने प्रदान किया।कार्यक्रम का संचालन सीमा केसरी और अर्चना अग्रवाल द्वारा मंजू मिश्रा के पर्वेक्षण में संपन्न हुआ। धन्यवाद ज्ञापन सुबह ए बनारस के उपाध्यक्ष श्री प्रमोद मिश्रा, डॉ वीरेंद्र प्रताप सिंह ने किया। कला निधि कार्यक्रम में सहयोग श्री श्याम कुमार केशरी,श्री अभय श्रीवास्तव, श्री कृष्ण मोहन पांडे, श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ,श्री अजय पांडे का रहा। अवसर पर भारी संख्या में दर्शक गण उपस्थित रहे।