संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
रामनगर- पैगंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (सल्ल.) के दामाद हज़रत मौला मुश्किल कुशा अली की जयंती की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को मकतबे इमामिया गोलाघाट में महफ़िल हुई। जश्न का प्रारंभ तिलावते कुरान पाक से हुआ। तकरीर करते हुए मौलाना इरशाद हुसैन जपला हुसैनाबाद ने कहा कि शेरे खुदा की विलादत 13 रजब को मक्का मुअज्ज़मा के खान-ए-काबा में हुई। नबी-ए-करीम ने फरमाया कि मैं अगर इल्म का शहर हूं तो अली उसका दरवाजा हैं। हज़रत अली ने दुनिया को जो पैगाम दिया है उसपर अमल करने की जरुरत है। महफ़िल में दबीर, अता गदीरी, अज़हान हुसैन, यूशा तुराबी, बाक़र रज़ा, अल्फाज़ रामनगरी, काज़िम दरगाही, आबिद हुसैन, बाक़र आब्दी, मुजतबा, अरमान, रज़मी, मोहम्मद मेहंदी, शैजी हसन, यूसुफ़ रिज़वी रईस, बज़्मी, जेई मोहम्मद मेहंदी आदि शायरों ने कलाम का नज़राना पेश किया। इस मौके सय्यद अख्तर रज़ा आब्दी, इनाम रज़ा, मुन्ना मिर्ज़ा, शमीम अख्तर, मो० आसिफ, रज़ा काज़मी, हादी मिर्ज़ा, मिंटू, कुमैल, अरशद हुसैन, अरमान, सरफ़राज़, समीर, इमरान, बल्लू, मोहम्मद, मोहम्मद असर ज़ैदी, यूसुफ़ रिज़वी रईस, नदीम आब्दी, रज़ा काज़मी, शबीब हैदर सहित सैकड़ों लोग उपस्थित हुए। इस मौके पर बिजली के झालरों से पूरा परिसर जगमगा रहा था। लोगों ने मिठाइयां बांटकर हजरत अली की जयंती की खुशियां मनाई। महफ़िल का संचालन नदीम आब्दी ने किया।।