संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
*रामेश्वर।* धूमिल लोकतंत्र के बदलते समय के सजग प्रहरी रहे। उन्होंने अपने कविताओं के द्वारा एक दूसरे प्रजातन्त्र की तलाश में अपनी कविता को आम जन की आवाज में प्रकट करते रहे। धूमिल ऐसे पहले कवि हैं जिन्होंने हिंदी में अपने नए मुहावरे गढ़े हैं।हिंदी साहित्य के क्रम में कबीर-निराला, मुक्तिबोध और धूमिल को रखा जा सकता है।87 वी धूमिल जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि धूमिल के सहपाठी रहे कवि रामेश्वर त्रिपाठी ने व्यक्त की।
विशिष्ट अतिथि प्रो0 हिंदी विभाग डॉ0 श्रद्धानन्द ने कहा कि गांव की असली संस्कृति धूमिल की कविताओं में दिखती है। धूमिल का काल विचार के संघर्षो का काल था। मुख्य वक्ता प्रो0 गोरख पांडेय हिंदी विभाग उदय प्रताप कालेज ने कहा कि आम आदमी की आवाज को पहचाने की क्षमता धूमिल की कविता में दिखती है। धूमिल की रचनाएं जनतंत्र के लिए जागरण का माध्यम है। विशिष्ट वक्ता हौशिला प्रसाद 'अन्वेषी'ने कहा कि धूमिल ने पीछे नहीं बल्कि शोषण,अत्याचार को कविता द्वारा नया रास्ता व तेवर दिखाया है।
कवि गोष्ठी में कवि देवीशंकर सिंह, केशव शरण,गणेश सिंह 'प्रहरी ,दीपक शर्मा,केशव शरण, विपिन कुमार सिंह,डॉ0 चंचल सिंह,डॉ0 प्रभाकर सिंह, डॉ0 आर के0 सिंह ,सुधांशु ,अशोक कुमार मिश्र व किशन कुमार
ने कविता पाठ किया।
धूमिल समाज मे शोषण के विरोध में कविताएं लिखकर प्रेरणा पुरुष बन गए।
रोहनियां विधायक डॉ0 सुनील पटेल ने कहा कि जनचेतना और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने वाले कवि धूमिल को आगे बढ़ाने का दायित्व जनप्रतिनिधियों के साथ आमजन की है। इनके गौरव ,सम्मान के लिए गाँव की मिट्टी से सनी असली लोकतंत्र की आजादी धूमिल को याद करने के लिए एक दिन नहीं हर पर्व पर गोष्ठियों के जरिये याद किये जाने की जरूरत है। मेरी सच्ची श्रद्धांजलि है और गांव में धूमिल जी के नाम पर धूमिल सड़क बनवाने ,लाइब्रेरी स्थापना का आश्वासन दिया।
युवाओ ने मनीष पटेल के नेतृत्व बालिका सम्मान व पर्यावरण प्रदूषण जागरूकता रैली निकाली गई।
अध्यक्षता करते हुए डॉ0 सदानन्द सिंह ने कहा कि धूमिल वर्तमान परिस्थितियों में समयानुसार अपने तेवर और प्रेम भरी गुर्राहट की कविताओं को लिखा करते थे। जनकवि धूमिल के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूलाधार उनके गांव खेवली की माटी है।
धूमिल के ज्येष्ठ पुत्र रत्न शंकर पांडेय ने कहा कि -एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है,न रोटी खाता है वह सिर्फ रोटी से खेलता है। मैं पूछता हूँ वह तीसरा आदमी कौन है मेरे देश की संसद मौन है।अहम सवाल रोटी पर संसद किस तरह मौन रहती है इसे धूमिल ने अपनी कविताओं में बड़ी बेवाकी से कहा है। धूमिल ने अपनी बात रखने के लिए कविता को माध्यम बनाया ।वे जनवादी तेवर वाले महापुरुष रहे।
धूमिल जयंती का शुभारम्भ आगन्तुक साहित्यकारों, कवियों ,रचनाकारों व समाजसेवियों द्वारा तैल चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया ।
आये हुए साहित्यकारों ,कवियों, रचनाकारों के प्रति धूमिल के पुत्र रत्नशंकर पांडेय ,आनन्द शंकर पांडेय व अशोक पांडेय ने धन्यवाद सहित स्वागत कर आभार प्रकट किया।कुशल संचालन डॉ0 प्रभाकर सिंह ने किया।