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निजी अस्पतालों में सरकारी नौकरी का फर्ज निभा रहीं आशाएं

Updated on: 21 July, 2026

गोपनीय बैठक में मरीज भेजने का बना संकल्प, नकदी और उपहार बांटने का आरोप

पुर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़ ब्यूरो चीफ विवेक सोनी 

जौनपुर खेतासराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) सोंधी से जुड़ी आशा बहुओं और आशा संगिनियों की कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में गम्भीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाली कुछ आशा बहुएं निजी अस्पतालों से सांठगांठ कर मरीजों को वहां भर्ती कराने का काम कर रही हैं जानकारी के अनुसार पीएचसी सोंधी क्षेत्र में लगभग 260 आशा बहुएं तथा 12 आशा संगिनियां कार्यरत हैं। ये स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं, जिनकी जिम्मेदारी गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, परिवार नियोजन तथा ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की होती है। इन्हें फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में सरकार द्वारा मानदेय भी दिया जाता है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ आशा बहुएं निजी लाभ के उद्देश्य से गरीब मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ले जाने के बजाय निजी अस्पतालों में भर्ती कराती हैं। आरोप यह भी है कि सामान्य प्रसव के मामलों में भी ऑपरेशन कराने का दबाव बनाया जाता है, जिससे संबंधित निजी अस्पतालों और जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचता है सोमवार को नगर स्थित एक निजी अस्पताल में आशा संगिनियों के नेतृत्व में एक गोपनीय बैठक आयोजित होने की चर्चा रही। आरोप है कि बैठक में आशा बहुओं को निजी अस्पतालों में मरीज भेजने के लिए प्रेरित किया गया। बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए थे। बताया जाता है कि आशाओं से ड्रेस कोड में न आने और मोबाइल फोन का प्रयोग न करने को कहा गया था सूत्रों के अनुसार बैठक में विशेष भोज की व्यवस्था की गई थी तथा प्रतिभागियों को नकदी और उपहार भी वितरित किए गए। इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों से मरीजों को सरकारी इलाज का भरोसा देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है, जहां उनसे मनमाना शुल्क वसूला जाता है। बदले में संबंधित आशा कर्मियों को कमीशन दिए जाने की बात कही जा रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के कई निजी अस्पताल मरीजों के भरोसे नहीं, बल्कि आशा नेटवर्क के सहारे संचालित हो रहे हैं। हालांकि, पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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