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विश्वविद्यालय से सम्बन्धित किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर क्षत्रिया स्कूल ट्रस्ट का ही हो-मारिघ्नमणि

Updated on: 17 April, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी। राज्य विश्वविद्यालय से संबंधित किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर उदय प्रताप कॉलेज एंड हीवेट क्षत्रिया स्कूल इण्डाउमेंट ट्रस्ट से ही किया जाना चाहिए क्योंकि जिस सोसायटी का पंजीयन धोखाधड़ी में निरस्त किया जा चुका है, वह सोसायटी किसी भी सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर सकती है। उक्त बातें बुधवार को प्राचीन छात्र भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान भिनगा नरेश एवं पूर्व अध्यक्ष(इण्डाउमेंट ट्रस्ट) स्व.राजा चन्द्रमणि कान्त सिंह के पुत्र एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष मारिघ्नमणि कान्त सिंह एवं सचिव आनन्द विजय सिंह ने संयुक्त रूप से कही।मारिघ्नमणि कान्त सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबंधित समस्त निर्णय समझौते का संवैधानिक अधिकार सिर्फ और सिर्फ उदय प्रताप कॉलेज एण्ड हीवेट क्षत्रिया स्कूल इण्डाउमेंट ट्रस्ट वाराणसी का है,ना कि धोखाधड़ी और फ्रॉड शिक्षा समिति को है,जिसे स्वयं सरकार ने पहले से ही निरस्त कर दिया हो। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय राजा उदय प्रताप सिंह जूदेव द्वारा अपने धन से भूमि,भवन की व्यवस्था करते हुए उदय प्रताप कॉलेज एण्ड हीवेट क्षत्रिया स्कूल इण्डाउमेंट ट्रस्ट वाराणसी नामक शिक्षण संस्थान की स्थापना की गई थी। जिसका संचालन एक चैरिटेबल इण्डाउमेंट फण्ड 1908 के द्वारा संचालित होता है। उन्होंने बताया कि एण्डाउमेंट फण्ड चैरिटेबल इण्डाउमेंट एक्ट 1890 की धारा 04 के अंतर्गत राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना 1139/ 14.12.1908 (वेस्टिंग ऑर्डर) के द्वारा कोषाध्यक्ष चैरिटेबल इण्डाउमेंट मे निहित कर दी गई। प्रबंधन योजना धारा 05 के अंतर्गत राज्य सरकार की शिक्षा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या- 1142 दिनांक 14.12.1908से सुनिश्चित की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अधिसूचना संख्या 121 एक्स वी/61दिनांक 19.01.1910 के द्वारा संस्था से संबंधित समस्त भूमि एवं भवन कोषाध्यक्ष चैरिटेबल इण्डाउमेंट में उक्त एक्ट की धारा 04 के अंतर्गत निहित कर दी गई है, जो संस्थापक उदय प्रताप कॉलेज एण्ड हीवेट क्षत्रिया इण्डाउमेंट ट्रस्ट वाराणसी द्वारा 1908 संचालित है।श्री मारिघ्नमणि ने मुख्यमंत्री का ट्रस्ट एवं राजर्षि परिवार की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा यूपी कालेज को राज्य विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा का ट्रस्ट व पूरा राजर्षि परिवार स्वागत करता है।अन्त में उन्होंने‌ निवेदन में कहा कि राजर्षि जी की मूल भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस राज्य विश्वविद्यालय का नाम उदय प्रताप क्षत्रिया विश्वविद्यालय का नाम दिया जाए ताकि इसकी पुरानी पहचान बरकरार रहे, क्योंकि पहले क्षत्रिया कॉलेज के नाम से यह कॉलेज विख्यात था। पत्रकार वार्ता के दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष मारिघ्नमणि कान्त सिंह के साथ सचिव आनन्द विजय सिंह,डा.रामसुधार सिंह भी उपस्थित रहे।

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