संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी -- उदय प्रताप कॉलेज के राजर्षि सभागार में बुधवार को हिंदी विभाग द्वारा किस्सा कोई बनाम कथा लेखन विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित कथाकार अलका सरावगी ने कहा कि किस्सागोई कहानी का प्राण है और एक ऐसी कला है जिससे कहानी सुनते समय हमारा ध्यान कहीं और नहीं जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कहानी लिखने का कोई एक तरीका नहीं होता और समय के साथ कथानक में भी बदलाव आया है। आज का विकास किस तरह हमारी परंपराओं का विनाश कर रहा है इसे कलिकथा बाय बाईपास में दिखाया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बलिराज पाण्डेय ने कहा की कहानी में चाहे जितना परिवर्तन आ जाए लेकिन किस्सागोई कहानी का अनिवार्य धर्म होता है यह किस्सागोई पाठक को कहानी पढ़ने के लिए आमंत्रित करती है। बुधवार को आयोजित इस कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने संचालन प्रोफेसर गोरखनाथ ने तथा धन्यवाद ज्ञापित प्रोफेसर मधु सिंह ने किया। इस अवसर पर डॉ. राम सुधार सिंह, डॉ. एमपी सिंह, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, प्रो. शाहिना रिजवी, रतन शंकर पाण्डेय, शिवकुमार पराग, प्रो. एनपी सिंह, प्रो. सुधीर राय, प्रो. शशिकांत द्विवेदी, प्रो. प्रज्ञा पारमिता, डॉ मोहम्मद आरिफ, प्रो. रमेश द्विवेदी, डॉ. अरविंद कुमार सिंह, प्रो. मनोज प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. गरिमा सिंह, प्रो.वन्दना मिश्रा, डॉ. प्रीति जायसवाल, प्रो. पंकज कुमार सिंह तथा काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे