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वंदे भारत से हाई-स्पीड ट्रेन तक,भविष्य की रेल यात्रा का खाका तैयार कर रहा ICF

Updated on: 17 September, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी। भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रेल तकनीक को नई गति देने की दिशा में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पीआईबी वाराणसी की ओर से आयोजित प्रेस टूर के तहत गुरुवार को पत्रकारों के दल ने ICF का भ्रमण किया और यहां आधुनिक रेल कोच निर्माण की अत्याधुनिक प्रक्रिया को करीब से देखा। इस दौरान ICF के चीफ वर्कशॉप इंजीनियर अनुपम चौहान ने पत्रकारों को फैक्ट्री की कार्यप्रणाली, कोच निर्माण की तकनीक,उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ICF में वंदे भारत ट्रेनसेट, अमृत भारत ट्रेन के कोच,कोलकाता मेट्रो सहित विभिन्न श्रेणियों के आधुनिक रेल कोच तैयार किए जा रहे हैं।

वंदे भारत से आगे अगली पीढ़ी की रेल तकनीक की तैयारी ICF अब बदलती यात्री जरूरतों और भविष्य की रेल परिवहन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अगली पीढ़ी के ट्रेनसेट और कोच विकसित करने पर जोर दे रहा है। वंदे भारत प्लेटफॉर्म को और विकसित करते हुए इसके स्लीपर संस्करण पर भी कार्य किया जा रहा है। साथ ही माल परिवहन के क्षेत्र में भी वंदे भारत प्लेटफॉर्म की उपयोगिता बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

हाई-स्पीड रेल परिवहन के लिए स्वदेशी क्षमता विकसित करने की दिशा में भी ICF और संबंधित संस्थानों द्वारा तकनीकी स्तर पर कार्य किया जा रहा है। यह प्रयास भारतीय रेल को भविष्य की तेज,सुरक्षित और आधुनिक रेल व्यवस्था के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वदेशी तकनीक की पहचान बना वंदे भारत वंदे भारत ट्रेनसेट ICF की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। स्वदेशी डिजाइन और तकनीक के साथ उच्च स्तर के स्थानीयकरण से तैयार इन ट्रेनसेट में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

आधुनिक सीटिंग व्यवस्था, बेहतर राइड कम्फर्ट,स्वचालित दरवाजे,जैव-वैक्यूम शौचालय,सीसीटीवी,यात्री सूचना प्रणाली तथा उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस वंदे भारत ट्रेनसेट भारतीय रेल के बदलते तकनीकी स्वरूप का प्रमुख उदाहरण बन चुका है।

ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विनिर्माण के क्षेत्र में भी ICF की उपलब्धियों को पहचान मिली है। वंदे भारत ट्रेनसेट के निर्माण में ऊर्जा दक्षता के लिए ICF को वर्ष 2024 में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

LHB कोच निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान ICF की उपलब्धियां केवल वंदे भारत तक सीमित नहीं हैं। आधुनिक LHB कोच के निर्माण में भी फैक्ट्री की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक ICF द्वारा 1,659 LHB कोच तैयार किए गए थे। वहीं,भारतीय रेलवे ने वर्ष 2014 से 2025 के बीच 42,600 से अधिक LHB कोचों का उत्पादन किया।

 

इसके अलावा मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क के लिए आधुनिक AC EMU रेक तैयार करने में भी भारतीय रेलवे की कोच निर्माण क्षमता का उपयोग किया जा रहा है।

 

यात्री सुविधा और सुरक्षा पर विशेष फोकस

 

ICF में कोच निर्माण के दौरान केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा को भी केंद्र में रखा जा रहा है। सीटिंग व्यवस्था,एयर कंडीशनिंग,सुरक्षा प्रणाली,यात्री सूचना प्रणाली,स्वच्छता और बेहतर राइड क्वालिटी जैसे पहलुओं में लगातार सुधार किया जा रहा है।

 

प्रेस टूर के दौरान पत्रकारों ने कोच निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा और यह समझा कि किस तरह तकनीक, नवाचार और कुशल विनिर्माण के माध्यम से आधुनिक रेल कोच तैयार किए जाते हैं।

 

भविष्य की रेल व्यवस्था की मजबूत नींव

 

ICF का यह दौरा पत्रकारों के लिए देश में विकसित हो रही स्वदेशी रेल तकनीक,आधुनिक कोच निर्माण और भविष्य की यात्री परिवहन व्यवस्था को करीब से समझने का महत्वपूर्ण अवसर रहा। वंदे भारत से लेकर स्लीपर ट्रेनसेट और हाई-स्पीड रेल तकनीक तक, ICF भारतीय रेल की बदलती तकनीकी यात्रा और देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।

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