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ध्रुवेश्वर महादेव का वार्षिक श्रृंगार

Updated on: 05 June, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी जिला मुख्यालय से 10 किमी ,पंचकोशी पड़ाव रामेश्वर महादेव से 5किमी दूर वाराणसी -जौनपुर मार्ग पर हरहुआ चौराहे के समीप ध्रुवेश्वर महादेव जी का मन्दिर स्थापित है। जहाँ प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। महादेव की अद्भुत और जाग्रत मन्दिर आकर्षण के साथ ठहराव की उत्तम व्यवस्था समेत कई अन्य देवों की मूर्ति के एक साथ दर्शन होते हैं। प्रतिवर्ष वार्षिक श्रृंगार, महाशिवरात्रि पर महारामायण कथा ,पूजन श्रद्धालुओं द्वारा धूमधाम से होता है।

*मन्दिर का इतिहास*- ध्रुवेश्वर महादेव मंदिर 250 वर्ष प्राचीन मंदिर है जिसका नवनिर्माण व पुनर्स्थापना संत श्री उड़िया बाबा ने कराया। शिवलिंग के अलावा श्री राम जानकी ,हनुमान व शनिदेव का मन्दिर स्थापित है। पुरनिये बताते हैं कि 'हर' का अर्थ है 'शिव' और 'हुआ'का अर्थ है 'उतपत्ति' यानि जिस पवित्र स्थान पर भगवान शिव का आगमन हुआ वह स्थान हरहुआ नाम से प्रसिद्ध हो गया। यहीं पर भगवान शिव की स्तुति के लिए हनुमान जी पहुंचकर पंचकोशी मार्ग पर भक्तिलीन हो गए जहां आज भक्तो का दर्शन पूजन के लिए जमावड़ा लगता है।

*मन्दिर की विशेषता*- अतिसुन्दर रमणीय मन्दिर आकर्षण का केंद्र है जहां मन्दिर के मध्य स्थापित शिवलिंग के ठीक सामने नन्दी की मूर्ति आधुनिक बरामदा वहीं बगल में हनुमान मंदिर व रामदरबार स्थल है जहाँ हर सनातनी रुककर शरणागत होता है तो नेमी स्थानीय श्रद्धालुजन जलाभिषेक व दर्शन कर मनवांछित कामना पूरी करते है। सावन महीने में महादेव,हनुमान जयंती पर श्रृंगार , रामष्टमी ,शनिवार को शनि पूजा व महाशिवरात्रि पर मानस पाठ सहित महाभण्डारा में प्रसाद के लिए भीड़ उमड़ती है।

 

*पुजारी- रमेश चंद दास*- श्री ध्रुवेश्वर महादेव भक्तों की पुकार सुनने के लिए वर्ष पर्यंत यहां विराजमान हैं।कोई भी भक्त मनोकामना लेकर यहाँ आता है भोलेनाथ प्रार्थना जरूर सुनते हैं। मन्दिर प्रांगण में एक अदद विश्रामालय की जरूरत है

*दिवाकर सिंह नेमिभक्त*- धुरुवेश्वर महादेव सहित हनुमान ,राम जानकी व शनिदेव मन्दिर आस्था विश्वास का स्थल है जहाँ आस पास सहित अन्य स्थलों से आये भक्तों,कांवरियों को दर्शन पूजन संग हर सुविधाएं मिलती है लेकिन एक अदद शौचालय, स्नानागार सहित रैन बसेरा व्यवस्था की जरूरत है जिला प्रशासन इसे पूरा कराए तो भक्त उनके ऋणी रहेंगे।

 

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