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राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव पर राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ आयोजन

Updated on: 17 June, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

अतुल राय

 

वाराणसी -- उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय के राजर्षि सभागार में सोमवार को राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में जयप्रकाश यूनिवर्सिटी छपरा के एक्स वीसी प्रो.हरिकेश सिंह व विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो.शोभा गौड़,प्रो.सीमा सिंह,प्रो.आर रंजन सिंह उपस्थित रहे। सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो.हरिकेश सिंह ने कहा कि राजर्षि उदय प्रताप सिंह जू देव का व्यक्तित्व हिमालय से ऊंचा था तथा वह अपने समय के शंकर थे। उनमें बुद्ध शंकराचार्य और विवेकानंद का समन्वय था। उन्होंने उदय प्रताप कॉलेज, महेंद्रवी छात्रावास भिनगा राज अनाथालय जैसे कई प्रकल्प काशी को दिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर शोभा गौड़ ने कहा कि राजर्षि का जीवन, शिक्षा, साहित्य एवं आध्यात्म का समन्वय है। आध्यात्मिक विकास ही व्यक्ति को समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियां से जोड़ता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि राजर्षि पर साहित्य का सृजन एवं उसका प्रकाशन ही राजर्षि को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के आचार्य प्रोफेसर रजनी रंजन सिंह ने कहा कि राजर्षि का दर्शन कर्तव्य पर आधारित है, ना कि अधिकार पर आधारित। यह दर्शन पक्षपात रहित है तथा विश्व के समस्त शुभ तत्वों का समाकलन करता है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से राजर्षि जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर कराया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने अपने स्वागत उद्बोधन में राजर्षि की व्यक्तित्व और कृतित्व के कुछ पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित कार्यक्रम आयोजक सचिव प्रोफ़ेसर रमेशधर द्विवेदी ने तथा संचालन प्रोफेसर रेनू सिंह ने किया। संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ राम सुधार सिंह ने कहा कि जाति एवं धर्म आधारित संस्थाओं की स्थापना का मूल उद्देश्य नवजागरण काल में भारत की जनता को इस आशय से शिक्षित करना था कि वह अपनी अस्मिता को जीवित रखते हुए राष्ट्र निर्माण का कार्य कर सकें। संगोष्ठी को डॉक्टर अशोक कुमार सिंह, डॉक्टर उदय प्रताप सिंह, डॉक्टर अरविंद सिंह एवं प्रोफेसर प्रदीप सिंह ने भी संबोधित किया। प्रोफेसर प्रदीप सिंह ने कहा कि शिक्षा और अनुशासन के क्षेत्र में उदय प्रताप कॉलेज की एक विशिष्ट पहचान है। इस अवसर पर प्रोफेसर एनपी सिंह, प्रोफेसर गरिमा सिंह, प्रोफेसर शशिकांत द्विवेदी, प्रोफेसर मनोज प्रकाश त्रिपाठी, प्रोफेसर सुधीर राय,प्रो सुधीर शाही,प्रोफेसर प्रज्ञा परमिता, प्रोफेसर निलिमा सिंह, प्रोफेसर अलका रानी गुप्ता, प्रोफेसर गोरखनाथ पाण्डेय, समेत महाविद्यालय की अनेकों शिक्षक, शिक्षिकाएं व छात्रगण उपस्थित 

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