संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़
वाराणसी। पवित्र नगरी वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र में वीर शिरोमणि महाराजा सुहेलदेव की जयंती बड़े ही उत्साह,श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिलाओं,युवाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर एकजुटता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में बिनोद राजभर उपस्थित रहे,जबकि विभिन्न क्षेत्रों से आए जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई। आयोजन की शुरुआत आशापुर से महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा तक भव्य शोभायात्रा के साथ हुई।ढोल-नगाड़ों,जयघोष और राष्ट्रभक्ति के नारों के बीच निकली यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी रही। यात्रा रंगोली गार्डन स्थित सुहेलदेव पार्क पहुंचकर सम्पन्न हुई,जहां महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।अपने संबोधन में बिनोद राजभर ने कहा कि हमें महाराजा सुहेलदेव के सपनों को साकार करने के लिए निरंतर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि संघर्ष का मार्ग लंबा अवश्य है,लेकिन जब तक लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति न हो,तब तक रुकना या थकना नहीं है। यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी और लोकतंत्र में गरीब,वंचित और महान विभूतियों को वास्तविक सम्मान दिलाने का मार्ग भी। इस अवसर पर राकेश राजभर,सतीश राजभर,अशोक राजभर,रमेश राजभर,डॉ. राहुल राजभर,मदन राजभर,सोनू राजभर सहित हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। महेंद्र राजभर (आजाद) ने अपने वक्तव्य में कहा कि जब सनातनी समाज बंटा हुआ था,तब महाराजा सुहेलदेव ने उसे एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया था। उन्होंने जयंती आयोजन को सामाजिक एकता का प्रतीक बताते हुए इसे आगे भी निरंतर मनाने का संकल्प दोहराया। जिलाध्यक्ष उमेश राजभर ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संगठन की मजबूती और सामाजिक न्याय के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर बल दिया।यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह था,बल्कि सामाजिक एकता,संघर्ष और संकल्प का विराट प्रदर्शन भी साबित हुआ।