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राजकीय पुस्तकालय में " जनक‌नन्दिनी " महाकाव्य का हुआ लोकार्पण 

Updated on: 03 August, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी -- अर्दली बाजार स्थित जिला राजकीय पुस्तकालय में रविवार को मधुकर मिश्र कृत " जनक नंदिनी " महाकाव्य का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर वाराणसी एवं उसके आसपास के कई साहित्यकार, कवि, लेखक उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ उपस्थित अतिथियों द्वारा माता सरस्वती जी के मूर्ति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर कराया गया। इस मौके पर विश्व हिंदी शोध संवर्धन अकादमी एवं कविताम्बरा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हीरालाल मिश्र मधुकर कृत प्रबंध काव्य पर अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर राजाराम शुक्ला ने कहा कि जनक नंदिनी प्रबंध काव्य एक उच्च कोटि की रचना है। जिसकी मूल कथा रामायण होते हुए भी समसामयिक जीवन पद्धति को प्रभावित करती है। उन्होंने सीता से अशोक वाटिका में राम के मिलने की कथा को अविस्मरणीय बताया। कहा कि जनक नंदिनी महाकाव्य रस, छंद, अलंकार की दृष्टि से अप्रतिम है।

 वरिष्ठ वक्ता साहित्यकार डा.राम सुधार सिंह ने कहा कि सीता का चरित्र कवियों को सदा आकर्षित करता रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि कवि का जुड़ाव धरती से होता है और सीता धरती की पुत्री हैं। धरती से जुड़ाव सीता से जुड़ाव है। जनक नंदिनी महाकाव्य को मधुकर मिश्र ने 15 सर्गों में सीता के उदात्त, त्यागमय,और लोकहितकारिणी व्यक्तित्व को अत्यंत प्रवाहमय छन्दों में वर्णित किया है। वरिष्ठ अतिथि सदाशिव कुमार द्विवेदी ने कहा कि जनक नंदिनी प्रबंध काव्य में भावों की मनोरम प्रस्तुति सौंदर्य और नीति का अद्भुत समन्वय, विकास और विनाश की लीला, दुर्भाग्य और सौभाग्य की समान्तरता, क्रोध और बैराग्य, नीति और अनीति, सदाचार और अनाचार की व्यापक प्रस्तुति है। वरिष्ठ अतिथि महाराष्ट्र राज्य हिंदी अकादमी के पूर्व प्रभारी अध्यक्ष प्रोफेसर शीतला प्रसाद दुबे ने कहा कि जनक नंदिनी प्रबंध काव्य सीता जी के जन्म से लेकर भूमि में समा जाने की कथा से समृद्ध है। स्वागत उद्बोधन में मधुकर मिश्र ने कहा कि सीता भारतीय संस्कृति की आत्मा है। सीता को पवित्रता, अपूर्व त्याग, असीम धैर्य और नारी शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। राम की सर्व व्यापक अभिरामता सीता के संयोग के कारण ही है। इस कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापित श्री नारायण खेमका ने किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉक्टर चंद्रभाल सुकुमार, पंडित भोलानाथ त्रिपाठी विह्वल, दीपक बजाज, डा. संतोष कुमार सिंह, कंचन सिंह परिहार, गिरीश पाण्डेय काशिकेय, प्रो. देवव्रत चौबे, डा. अशोक कुमार सिंह, डा. सुभाष चंद्र, डा. अत्रि भारद्वाज, डॉ जय प्रकाश मिश्रा, विजय शंकर पाण्डेय, कविराज सिंह, गौरीशंकर तिवारी, साहित्यकार डा. राम सुथार सिंह आदि कवियों ने भी अपने विचार रखे। संचालन डॉ रामसुधार सिंह ने तथा गिरीश पाण्डेय ने संयुक्त रूप से किया। टीकाराम आचार्य, डा. नसीमा निशा, डा. करुणा सिंह, रितु दीक्षित, मधुलिका राय, झरना मुखर्जी, संतोष प्रीत आदि कवियों ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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