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हिन्दी दिवस पर यूपी कालेज में " हिन्दी है पहचान हमारी" बिषयक संगोष्ठी का हुआ आयोजन 

Updated on: 15 September, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज

विनोद नाथ यती

 

वाराणसी -- उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय के राजर्षि सभागार में सोमवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर " हिन्दी है पहचान हमारी" बिषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी के वरिष्ठ कवि डॉ अशोक कुमार सिंह व विशिष्ट अतिथि के रूप में जनकवि शिवकुमार पराग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि व प्राचार्य द्वारा संयुक्त रूप से पूज्य राजर्षि जी के मूर्ति पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर कराया गया।इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेन्द्र कुमार सिंह ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भारतीय संविधान सभा में सर्वाधिक बहस भाषा को लेकर ही हुई थी। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का 60 के दशक में गैर हिंदी प्रान्तों ने विरोध किया था, लेकिन आज हिंदी केवल कानून की भाषा के बल पर आगे नहीं बढ़ रही है, बल्कि उसे विस्तार देने का कार्य विशाल हिंदी जनता कर रही है। इसलिए आज हिंदी जहां एक ओर फिल्मों की भाषा, साहित्य लेखन की भाषा और ज्ञान विज्ञान की भाषा है, वहीं अपनी नई पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से भी कर रही है। मुख्य अतिथि डॉक्टर अशोक कुमार सिंह ने छात्र- छात्राओं को संबोधित करने के साथ ही "शहर इतना शहर इतना शहर हो जाएगा, आदमी का आदमी रहना समर हो जाएगा" तथा अंधों के शहर में आईना बेचता हूं। आदि कविताएं सुनाकर श्रोताओं के मन को खूब सराहा। विशिष्ट अतिथि शिव कुमार पराग ने कहा कि हिन्दी एक लोक भाषा है और उसे ताकत लोक से ही मिलती है। लोक से जुड़कर ही आज वह अपनी वैश्विक पहचान बना रही है। शिवकुमार पराग ने अपनी विशिष्ट कविता" तिनका तिनका जोड़कर लाती रही जिंदगी" सुनाई जिसे सुनकर श्रोता भावुक हुए। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर सदानंद सिंह ने कहा कि हिंदी जोड़ने वाली भाषा है। यह कार्य उसने राष्ट्रीय आंदोलन में तो किया ही था आज भी यह कार्य कर रही है। इस समारोह में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह ने किया। इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की ओर से आंचल प्रजापति, सुधांशु दुबे, श्रेया जायसवाल तथा पिंकी उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस संगोष्ठी का संचालन प्रोफेसर गोरखनाथ ने तथा आभार प्रोफेसर मधु सिंह ने प्रकट किया। इस संगोष्ठी में प्रमुख रूप से प्रोफेसर रमेशधर चतुर्वेदी, प्रोफेसर पंकज कुमार सिंह, प्रोफेसर सुधीर कुमार राय, प्रोफेसर शशिकांत द्विवेदी, प्रोफेसर संजीव कुमार, प्रोफेसर तुषार कान्त श्रीवास्तव, डॉक्टर प्रदीप कुमार सिंह,डा.अनूप कुमार सिंह, डॉक्टर अशोक कुमार सिंह, डॉ अनिल कुमार सिंह,डा.शशिकान्त सिंह, डा.जितेन्द्र कुमार सिंह,डा.कृष्ण कुमार भारती, डा.संजय स्वर्णकार, डा.देवेश चन्द्र,डा.विजय कुमार सिंह, डॉ चन्द्रशेखर सिंह,डा.वंश गोपाल यादव,डा.अतुल कुमार पाण्डेय,डा.विनोद पाल, डा.लालेन्द्र सिंह,डा.नवीन कुमार यादव,डा.सत्य शरण मिश्रा,डा.नीलेश सिंह ,डा.चन्दन कुमार सिंह,डा.विनय कुमार समेत सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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