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विश्व मृदा दिवस पर कृषि विज्ञान केन्द्र कल्लीपुर में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन 

Updated on: 13 June, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी -- विश्व मृदा दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर में शुक्रवार को नेशनल प्रोजेक्ट आन स्वायल हेल्थ एंड फर्टिलिटी योजना के अंतर्गत कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में संयुक्त निदेशक कृषि वाराणसी मंडल शैलेंद्र कुमार, विशिष्ट अतिथि के रूप में उप कृषि निदेशक वाराणसी अमित जायसवाल और सहायक निदेशक मृदा वाराणसी राजेश राय उपस्थित रहे। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक शैलेंद्र कुमार ने कहा कि मिट्टी अनमोल है। इसमें स्वाद एवं रंगों की भरमार है। इसे संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने मिट्टी के ऑर्गेनिक कार्बन एवं पीएच पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उपनिदेशक कृषि अमित जायसवाल ने कहा कि विश्व मृदा दिवस मनाने की परंपरा वर्ष 2014 से शुरू हुई विश्व में विज्ञान संघ के प्रयासों को थाईलैंड के राजा भूमिबोल का समर्थन प्राप्त हुआ। तब जाकर संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2013 से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाने का घोषणा किया गया। सहायक निदेशक ने मृदा परीक्षण की उपयोगिता एवं प्रयोग विधि पर विस्तार से जानकारी दी। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ नवीन कुमार सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मिट्टी और पानी की महत्वपूर्ण परस्पर निर्भरता पर जोर देता है, क्योंकि यह संसाधन हमारी खाद्य आपूर्ति में 95 फ़ीसदी से अधिक का योगदान करते हैं। केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ अमितेश कुमार सिंह ने विश्व मृदा दिवस का प्राथमिक उद्देश्य स्वस्थ मिट्टी को बनाये रखने और टिकाऊ मृदा संसाधन प्रबंधन को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर प्रतीक्षा सिंह ने दुनिया भर की सरकारों से मिट्टी से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने वाली नीतियां बनाने का आग्रह किया। केंद्र के कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉक्टर राहुल सिंह ने जैविक खेती को बढ़ावा देने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की कार्यान्वयन जैसी पहल मृदा स्वास्थ्य और संसाधनों का प्रबंधन करते हुए किसानों को लाभ पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता को विस्तार से चर्चा किया। इस कार्यक्रम में सहायक निदेशक मृदा द्वारा शिक्षकों को मृदा नमूना लेने की विधि,मृदा परीक्षण उपरांत पोर्टल से बनाते गये मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर 12 पोषक तत्वों की उपलब्धता और संतुलित उर्वरकों की मात्रा उपयोग करने की सलाह दी। इस कार्यक्रम में फसल अवशेषों का आच्छादन के रूप में का आरक्षण के रूप में प्रयोग करने, फसल अवशेषों को सड़ा गलाकर गुणवत्ता युक्त जैविक खाद तैयार करने की विधि, मिट्टी की उर्बरा शक्ति बढ़ाने, मिट्टी में जीवाश्म कार्बन कैसे बढ़ायें इसकी जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में केंद्र के राणा पियूष, अरविंद, देवमणि, नागेंद्र, अशोक सहित 107 किसानों ने हिस्सा 

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