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सत्य और न्याय की यात्रा था राष्ट्ररत्न का जीवन--प्रो.श्रद्धानन्द 

Updated on: 29 June, 2026

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी --राष्ट्र रत्न शिवप्रसाद गुप्त का व्यक्तित्व बहु आयामी था। उनका जीवन सत्य और न्याय की यात्रा था। वह स्वतंत्रता संग्राम में तन, मन, धन से समर्पित रहे। उन्होंने अपनी दानशीलता से देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनके दान से देश भर में बने असंख्य धरोहर आज भी विद्यमान हैं। उक्त बातें काशी विद्यापीठ हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्धानन्द ने रविवार को डा. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय काशी विद्यापीठ में बाबू शिवप्रसाद गुप्त की 143 वीं जयन्ती के अवसर पर कर्मपथ फाउंडेशन की ओर से आयोजित मेधा उद्यमिता अभिनन्दन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही। राष्ट्ररत्न के दृष्टिकोण में विकसित भारत और युवा पीढ़ी विशेष संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि राष्ट्ररत्न ने अपनी चौखट पर हर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सत्कार किया। नरम और गरम दोनों दलों के नायकों को दान देकर आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया। स्वतंत्रता संग्राम में आजादी का बिगुल फूंकने और जेल जाने वालों के परिवारों का हर स्तर पर पोषण किया। कहा कि काशी विद्यापीठ राष्ट्ररत्न की नैतिक दान का प्रतीक है। इसके पहले सारस्वत अतिथि दिव्यांग पीठ के संस्थापक महामंडलेश्वर कृपानंद महाराज ने कहा कि राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त राष्ट्रवादी सोच का धरातल पर सृजन करने वाले संत थे। बनारस में काशी विद्यापीठ, भारत माता मंदिर, मंडलीय अस्पताल आदि राष्ट्ररत्न की राष्ट्रवादी सोच का प्रतीक है। उन्होंने काशी विद्यापीठ की स्थापना कर तत्कालीन पीढ़ी में क्रांति की ज्वाला जलायी जिससे स्वतंत्रता समर प्रकाशमान हुआ। उन्होंने कहा युवाओं को इतिहास रटने नहीं इतिहास रचने का विचार करना चाहिए। युवा शक्ति के बल पर ही भारत विकसित राष्ट्र बनेगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पत्रकार संघ के अध्यक्ष डा. अत्रि भारद्वाज ने कहा स्वतंत्रता आंदोलन में मातृभाषा और पत्रकारिता के महत्व को समझा और हथियार बनाया। उन्होंने भारत के हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी। अध्यक्षता कर रहे वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा कि राष्ट्ररत्न का जीवन प्रेरणा का पीठ है। उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन के समय काशी विद्यापीठ को स्वदेशी शिक्षा की सिद्ध पीठ के रूप में स्थापित किया।उनकी विरासत विकसित भारत की नींव है। इस समारोह में कुलानुशासक प्रो. केके सिंह, मुख्य गृहपति प्रो.नागेन्द्र सिंह, समाजसेवी देव कुमार, राजू, सुशील गुप्ता योगी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।समारोह में राष्ट्ररत्न के सम्मान पर आधारित संकल्प दर्पण पुस्तक का विमोचन भी किया गया और उद्यमियों एवं मेधावियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन छात्रसंघ उपाध्यक्ष शिवजनक गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित अंकित कुमार ने किया। स्वागत पू्र्व उपाध्यक्ष प्रेमप्रकाश गुप्ता ने किया।इस अवसर पर रतनदीप गुप्ता,अश्वनी जायसवाल,प्रबोध राय, गोपाल गुप्ता,रत्नेश गुप्ता को राष्ट्ररत्न पथराही उद्यमी सम्मान से तथा प्रीतम, सलोनी यादव, आयुषी वत्सल, मोनिका, तेजस्विनी, खुशबू अग्रवाल, पूर्णिमा सेठ, तनीषा गुप्ता, शिवांगी बाजपेई, हिमांशी रस्तोगी, निर्जला रस्तोगी, साक्षी केसरी, सृष्टि शर्मा, प्रियांशी उपाध्याय,वैष्णवी, नैना, अंजलि आदि को राष्ट्ररत्न मेधा सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर रमाकांत सिंह, श्याम सेठ, अंकित दुबे, आकाश अग्रहरि, राहुल गुप्ता, दुर्गेश जायसवाल, रचित गुप्ता, रितेश गुप्ता, निखिल केसरी, विवेक गुप्ता, रवि, अंकित जायसवाल, विशाल गुप्ता, सौरभ सोनकर, शिवम निराला, किशन मौर्य, राहुल भारद्वाज, सैयद सैफ, आनंद सोनकर, दिव्यांशु, सावन सोनकर, आयुष आदि मौजूद रहे।

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