अतुल राय की खास रिपोर्ट
*रामेश्वर।* पुरानी धरोहरों को संरक्षित करने और निर्माण कला को जीवंत बनाये रखने के लिए सरकार ने देश मे परम्पराओं को धरोहरों के जीर्णोद्धार के दिशा में केंद्रित कार्य करा रही है। उ0प्र0 पर्यटन विभाग जनपद वाराणसी में ओवर ऑल टूरिज्म डेवलपमेंट के अंतर्गत पंचक्रोशी परिक्रमा स्थलों का विकास पुरानी शैली पर कार्य करने में जुटी है।पंचक्रोशी तीर्थ धाम रामेश्वर में कार्यदायी संस्था उ0 प्र0 प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड यूनिट-3 वाराणसी द्वारा स्वीकृत कार्य वर्ष 21-22 के तहत 8.82 करोड़ रुपये से 7 धर्मशालाओं के पुनरोद्धार,लाइटिंग,वरुणा नदी पर 40 मीटर लम्बा घाट व साइनेज का कार्य करा रही है।इस कार्य को मेसर्स अनीता कंस्ट्रक्शन प्रा0 लिमिटेड करा रही है।निर्माण कार्य के गुणवत्ता व पुरानी शैली सहित सामग्री की सच्चाई को परखने के लिए मीडिया टीम जब कार्य स्थल पर पहुंचा तो कार्य करा रहे ठीकेदार की टीम कैलाश सिंह, नवीन सिंह,रूपेश सिंह व साजन सिंह से मिला।उन्होंने कार्य के अगस्त 22 से प्रारम्भ होना बताया जिसे दिसम्बर 2023 तक पूरे करने की जानकारी दी। जब उनसे पुराने धरोहरों खासकर धर्मशालाओ के जीर्णोद्धार की जानकारी पुराने शैली व सामग्री के प्रयोग के बाबत चर्चा किया गया तो कार्यस्थल पर मध्यप्रदेश व राजस्थान के कुशल कारीगरों से सीधा संवाद कराया। मेठ मनोज कुमार कुशल कारीगर ने अवगत कराया कि सामग्री के तौर पर गुड़,बेल,गोंद,उड़द दाल,सन,चुना,लाल बालू व सुर्खी सहित मुर्गा जाली का प्रयोग किया जा रहा है।तीन बड़े पक्के टैंक में चुने व सामग्री को अलग-अलग पकाई जाती है वहीं चार ड्रमों में अलग अलग गुड़,बेल,उड़द दाल व गोंद भिंगोई जाती है।जब पूरी तरह से पक जाती है तब इसको अनुपात में मिलाकर प्रयोग की जाती है।पुरानी दिवालो की कटिंग पहले कराई गई इसके बाद उसे पानी से धुलाई की गई है। इसके बाद सभी घोल का छिड़काव किया गया। मिक्चर सामग्री को 24 से 48 घण्टे तक पकाया जाता है। प्रथम व द्वितीय कोड के 15 दिन बाद फाइनल कोड दीवाल की कि जाती है।धर्मशालाओ के छत की ढलाई के बाबत बताया कि छत पर ब्रेक ब्लास्ट डाली जाती है उसके ऊपर टाप कोट (अल्ट्रा)कर फाइनल टच के पहले 3 से 4 इंच की ढलाई की जाती है।इसके बाद ही फाइनल टच दी जाती है।कमजोर छत के स्थान पर नीचे मुर्गा जाली डालने के बाद चुने का घोरा डाला जाता है।इसके बाद उपरोक्त तरीके का इस्तेमाल की जाती है।वहीं पत्थरों से बन रहे घाट व वरुणा नदी के किनारे साइनेज निर्माण के तरीकों की जानकारी दी। कार्यरत कारीगरों ने पंचक्रोशी परिक्रमा व शिव की नगरी बनारस में सपरिवार जुटकर कार्य करने पर खुशी जताते हुए कहा कि जब भगवान श्री राम मोक्ष व जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति के लिए एक रात रुककर इस स्थल को पवित्र बना दिया तो हम सभी धन्य हो रहे हैं। इस कार्य को भगवान की सेवा समझकर मन से कार्य मे जुटे हैं।ठीकेदार कैलाश सिंह व उनके सहकर्मियों ने कहा कि धर्म क्षेत्र में कार्य करने का अलग ही आनन्द मिल रहा है। यहाँ पूण्य कमाना पहला कार्य तो धन कमाना दूसरा है। हमारी प्राथमिकता भारतीय धरोहर को प्राचीन शैली द्वारा जीवन्तता प्रदान करना है। इस समय लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरे हो चुके है। जो पूरी तरह गुणवत्ता व मानक पर खरा मजबूत कार्य हुआ है।