अतुल राय की खास रिपोर्ट
*अलाव का अता-पता नहीं,पुराना कमरा ओढ़कर काट रहे समय*।*सरकारी आदेश का नहीं हो रहा अनुपालन।*हरहुआ।सरकारी आदेशों की धज्जियां जिला प्रशासन द्वारा खुद उड़ाई जा रही है। जिसका परिणाम है कि चट्टी-चौराहों, सार्वजनिक स्थलों,मन्दिर मठों में कहीं भी सरकारी अलाव जलते नहीं दिख रहा। जनजीवन इस तरह सिकुड़ गया है कि साधु-संत व भक्तजन पुराने कम्बल ओढ़कर मन्दिरों में सिकुड़े हुए समय बिता रहे हैं। जबकि प्रदेश सरकार ने अलाव जलाने के साथ -साथ जरूरत मन्दो में कम्बल वितरण का शासनादेश जारी किया है।गांव में जहाँ ग्रामीण लकड़ी करकट गोहरा जलाकर ठंड से निजात ले रहे हैं वहीं शाम होते ही सड़क व बाजार सुनी हो जा रही है। इंसानी जीवन के साथ पालतू पशुओं की हालत भी खराब है।दिन -रात कांपते हुए नजर आते हैं। अलाव को लेकर स्वतंत्र इकाई ग्राम पंचायतें भी कोई रुचि नहीं ले रही हैं।प्रधान कहते फिर रहे हैं कि सरकार इस मद में कोई धन ही नहीं भेजी है। वहीं समाजसेवियों ने सरकार के कथनी और करनी पर अंगुली उठाना शुरू कर दिया है। नमो नमः सेवादल बरेमा के अध्यक्ष रंजीत तिवारी,पर्यावरण प्रेमी मनीष पटेल,समाजसेवी प्रितेश कुमार त्रिपाठी,व्यापार मंडल प्रभारी सन्तोष कुमार ने अलाव जलाने के दिशा में त्वरित कार्यवाही की मांग की है।