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राजा दशरथ राम के बदले स्व प्राण तैयार देने  को पर राम नही

Updated on: 13 June, 2026

अतुल सोनी की खास रिपोर्ट

चोलापुर क्षेत्र-क्षेत्र के गोला गांव  के नाद नदी के तट पर हनुमान जी  मन्दिर में श्रीरामकथा महोत्सव के आज चौथे दिन श्रीबाल्क दास जी महाराज ने अपने भक्तों को बताया किराज दशरथ जी ने राम को अपने नेत्र से कभी ओझल नही देखना चाहते थे।इधर विश्वामित्र जी ने राम को जन कल्याण को बार बार मांग रहे रहे थे।इस  पर राजादशरथ जी ने कहा कि हे मुनि जी मेरा जमीन धन, राज्य,आदि सब ले ले पर मेरे राम को हमसे न मांगे यह मेरे नयन का तारा है।इस बीच वशिष्ठ जी राजा दशरथ जी को समझते हुये कहा कि आप मोह को त्यागेराम जन कल्याण को तारने के लिये पैदा हुये है। उनको इनके कार्य को करने से न रोके।इससे  समाज का अहित होगा।दशरथ जी की सहमति के बाद माता ने जरा सा देर नही लगाई क्योकि माता  जानती थी कि मेरा लाल ब्रह्म का अवतार है।उन्होंने तुरंत मुनि जी के साथ भेजने को तैयार हो गयी।सबकी अनुमति के बाद मुनि जी के साथ प्रभु राम लक्ष्मण और माता जी के साथ वन को चल दिया।वन में प्रभु राम ने मुनिजी के  यज्ञ को राक्षस को मार कर सफल कराया।इसी बीच जंगल मे कोई राम राम कह कर पुकार रहा था। इसी दौरान  प्रभु राम ने शिला से यह आवाज सुनी।इस शिला से सम्बंधित मुनि जी  ने पूर्व जन्म की घटना को बताया। प्रभु राम ने कहा कि मुनि जी   हमारा औतार यही सब जन  कल्याण करने को हुआ है। तुरन्त प्रभु ने शापित शिला हुई माता का उध्दार किया। आज के कथा में विशिष्ट जनों में शिवशंकर सिंह, विजय कुमार सिंह , विनोद कुमार सिंह,भरत सेठ, ध्रुव सिंह (बाबा),उषा सिंह,लाल जी श्रीवास्तव,केशवलाल श्रीवास्तव, अनिल सेठ, सुरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह आदि लोगो के साथ साथ सैकड़ो भक्त जन रहे

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