पुर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़ उप संपादक अतुल सोनी
वाराणसी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी कोर्ट का आदेश किया निरस्त, पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के निर्देश को बताया प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण सार्वजनिक सेवकों के खिलाफ जांच के आदेश से पहले बीएनएसएस की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन जरूरी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी की विशेष एससी-एसटी अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें चोलापुर थाने की महिला उपनिरीक्षक संध्या जायसवाल समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति संतोष राय की पीठ ने 13 अक्टूबर 2026 को पारित फैसले में कहा कि सरकारी कर्मचारियों के आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े आरोपों पर जांच का आदेश देने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।मामले के अनुसार, सुशीला देवी ने आरोप लगाया था कि 22 जुलाई 2026 की रात पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और उनके बेटे रोहित कुमार गौतम को हिरासत में ले गए। उन्होंने अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। विशेष अदालत ने 2 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज करने और 15 दिनों में जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।हाईकोर्ट ने पाया कि विशेष अदालत ने पुलिस रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पुलिसकर्मी का पक्ष लेने जैसी कानूनी आवश्यकताओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीएनएसएस की धारा 175(3) और 175(4) के तहत निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी कर ऐसा आदेश पारित नहीं किया जा सकता।