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*आदिवासी संस्कृति बचाओ महापंचायत चक्का गाँव में अधिकारों के मांग साथ हुआ सम्पन्न।*

Updated on: 27 October, 2026
*आदिवासी संस्कृति बचाओ महापंचायत चक्का गाँव में अधिकारों के मांग साथ हुआ सम्पन्न।*

अतुल राय की खास रिपोर्ट

 

हरहुआ।गोंडी धर्म संरक्षण समिति के जिला ईकाई वाराणसी के तत्वावधान में गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती स्मृति भवन,न्यास परिसर ग्राम चक्का,विकास खण्ड-हरहुआ में ‘‘आदिवासी संस्कृति बचाओं महापंचायत’’ का आयोजन भारी संख्या में अधिकारों के मांग संग हुआ सम्पन्न।गोंड आदिवासी जनजाति समाज के सैकड़ो महिला-पुरूष,समाज सेवी एवं प्रबुद्धजन उपस्थिति रहें। जिसमें गोंड आदिवासी जनजाति समाज के लोगों ने अनेक विषयों के चर्चा उपरान्त गोंडी संस्कृति,रीति-रिवाज,परम्परा,नेक-जोक,गोंडी भाषा,इतिहास,धरोहर आदि के सरंक्षण हेतु अनेक अधिकारों व मुद्दो पर चर्चा किया गया जिसमें मांग रखा।जनपद वाराणसी में गोंडी धर्म संस्कृति,प्राचीन स्मारको,धरोहरो आदि जिसमें बुंदी परकोटा घाट,बड़ादेव मन्दिर (गोंदौलिया),दिलकुशा गेस्ट हाउस चन्दौली,जौनपुर शाहीपुल के समीप गोंडवाना राज चिन्ह को पर्यटन विभाग द्वारा संरक्षित करने,जनपद वाराणसी के ग्राम गनेशपुर,चक्का,सेरवानीपुर,बेलवरिया,शिवरामपुर,ईश्वरपुर,सजोई,कपरफोड़वा,पलहीपट्टी,सभईपुर,आदि स्थानों पर स्थापित आदिवासी पेनठाना एवं धरोहरो को अभिलेखागार में पंजीकृत कर संरक्षित करने जनपद वाराणसी के तहसील सदर,राजा तालाब एवं पिंडरा में गोंड आदिवासी जनजाति की पूर्वजों की पैतृक संपत्ति को भय और प्रलोभन देकर उनकी जमीनों को भूमाफियाओं से बचाने व पिछड़ी जाति से बाहर कर अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल करने,व उत्तर प्रदेश राज्य के निवासरत गोंड जनजाति की उपजाति की पर्याय जाति नायक एवं ओझा (बाभन) ब्राह्मण जाति को गोंड जनजाति की उपजाति की सूची से विलोपित कर राज्य के आदिवासी जनजाति समाज के हक हकूक को बचाया जाए व राज्य के निवासरत गोंड आदिवासी जनजाति की प्रकृति पूजा गोगो,टोटम रीति-रिवाज परंपरा के विकास एवं संरक्षण हेतु गोंडी धर्म एवं भाषा बोली को राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्रदान करनेग्राम गनेशपुर,परगना,शिवपुर,जिला-वाराणसी में चयनित भूमि पर आदिवासी व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र एवं बहुउद्देश्यीय कार्य की स्थापना कर प्रदेश एवं जनपद के आदिवासी जनजाति समाज के छात्र-छात्राओं को तकनीकि शिक्षा प्रदान करने व ग्राम-चक्का,विकास खण्ड-हरहुआ,वाराणसी के वरूणा नदी के तट के ‘‘भोजली घाट’’ पर गोंड समाज की प्राचीन परम्परा को प्रत्येक वर्ष भोजली पर्व धूम-धाम से वरूणा नदी के किनारे पर भोजली घाट को पक्का घाट बनवाया जाए।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि–प्रेम सिंह सैयाम अनुपपुर,गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति मध्य प्रदेशसंयोजक–संतोष सिंह मरकाम वाराणसी,कमलाभन सिंह कुसरो,लल्लू नेटी,चंद्र भान सिंह मरावी,विनोद कुमार,राकेश कुमार,श्याम अशारे,गब्बर गोंड,दिनेश गोंड,दीना गोंड,अखिलेष गोंड,सुक्खू गोंड भुमक,मनीष गोंड,संतोष सिंह मरकाम,रानी देवी –पूर्व ग्राम प्रधानबेबी शाह गोंड,हिरवती मेश्राम,रेनू मेश्राम,रेखा मेश्राम,रीना गोंड,अरविंद कुमार गोंड आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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