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पीपल वृक्ष के नीचे उपवास पर बैठे बीएचयू के सहप्राध्यापक,आध्यात्मिक जागरण का दिया संदेश

Updated on: 28 October, 2026
पीपल वृक्ष के नीचे उपवास पर बैठे बीएचयू के सहप्राध्यापक,आध्यात्मिक जागरण का दिया संदेश

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में कार्यरत सहप्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार ने जिला मुख्यालय वाराणसी परिसर में पीपल के वृक्ष के नीचे सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक उपवास रखकर अपनी मांगों और विचारों को सार्वजनिक किया। डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि दूषित व्यक्ति का अन्न-जल ग्रहण करने से मन भी दूषित होता है। उन्होंने कहा कि यदि दूषित प्रवृत्ति वाले व्यक्ति द्वारा भगवान को भोग लगाया जाएगा तो इससे धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक पवित्रता प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि ईश्वर की कृपा के बिना जीवन में वास्तविक सफलता संभव नहीं है। उन्होंने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारों के पक्षपातपूर्ण निर्णयों के कारण मंदिर व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों की भागीदारी बढ़ी, जिनकी धार्मिक आस्था पर प्रश्न उठते रहे हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश और केरल के कुछ मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं और मतदाताओं ने स्वयं को ठगा हुआ महसूस किया। डॉ. सुनील कुमार ने धार्मिक और पौराणिक उदाहरण देते हुए कहा कि राम और कर्ण,वेदव्यास और वाल्मीकि,हनुमान और कालनेमि जैसे पात्रों की प्रकृति और उद्देश्य अलग-अलग रहे हैं,लेकिन वर्तमान समय में इन अंतरों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे समाज की सोच में भ्रम और विषाक्तता बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि भगवान राम ने धर्म की स्थापना के लिए संघर्ष किया, जबकि कर्ण अधर्म के पक्ष में खड़ा रहा। ऐसे में खलनायक को नायक की तरह प्रस्तुत कर जनता की भावनाओं के साथ छल किया जा रहा है।डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि वे पिछले दो दशकों से स्वास्थ्य के आध्यात्मिक पहलुओं पर अध्ययन कर रहे हैं और नाम एवं स्वरूप बदलकर होने वाली आध्यात्मिक हेराफेरी को रोकने के लिए जनजागरण अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी प्रवृत्तियां व्यक्ति के तन,मन और धन तीनों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि समाज तक वास्तविक तथ्यों को पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी उद्देश्य को लेकर उन्होंने यह उपवास रखा है,ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और समाज में जागरूकता बढ़े।

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