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बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी? जानिए हज़रत इब्राहिम (अ.स.) की अज़ीम दास्तान : शबा खान

04 July, 2026  |  12:22 PM
बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी? जानिए हज़रत इब्राहिम (अ.स.) की अज़ीम दास्तान : शबा खान

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी। ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद का त्योहार हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) के सब्र,इबादत और अल्लाह की राह में दी गई अज़ीम कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं,बल्कि अल्लाह के हुक्म के आगे पूरी तरह सर झुका देने और अपनी सबसे प्यारी चीज़ तक कुर्बान कर देने के जज़्बे का पैग़ाम देता है। इस्लामी रिवायत के मुताबिक,अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहिम (अ.स.) को ख़्वाब में दिखाया कि वह अपने सबसे प्यारे बेटे हज़रत इस्माइल (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह की राह में कुर्बान कर रहे हैं। चूंकि नबियों का ख़्वाब अल्लाह का हुक्म माना जाता है,इसलिए हज़रत इब्राहिम (अ.स.) ने इस हुक्म को पूरा करने का फैसला किया। जब उन्होंने अपने बेटे हज़रत इस्माइल (अ.स.) को इस बारे में बताया, तो उन्होंने बड़े सब्र और खुशी के साथ कहा—"अब्बा जान! आपको जो हुक्म मिला है,उसे पूरा कीजिए। इंशाअल्लाह,आप मुझे सब्र करने वालों में पाएंगे।" इसके बाद हज़रत इब्राहिम (अ.स.) अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। कहते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली ताकि बाप का प्यार उन्हें रोक न सके। लेकिन जैसे ही उन्होंने छुरी चलाई,अल्लाह तआला ने उनकी इस सच्ची नीयत,ईमान और कुर्बानी के जज़्बे को कबूल फरमाया। हज़रत इस्माइल (अ.स.) की जगह एक दुम्बा भेज दिया गया और वह सही-सलामत रहे। इस तरह हज़रत इब्राहिम (अ.स.) अल्लाह के इस बड़े इम्तिहान में कामयाब हुए। तभी से मुसलमान बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी पेश करते हैं। कुर्बानी का मकसद सिर्फ जानवर ज़बह करना नहीं,बल्कि इंसान के दिल में अल्लाह के लिए मोहब्बत,तक़वा और फर्माबरदारी पैदा करना है। कुरान शरीफ में साफ़ कहा गया है कि अल्लाह तक न जानवर का गोश्त पहुंचता है और न खून,बल्कि इंसान की नेक नीयत और तक़वा पहुंचता है।गोश्त के तीन हिस्से करने की हिदायत इस्लाम में कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटने की ताकीद की गई है—पहला हिस्सा गरीबों,मोहताजों और यतीमों के लिए दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों,दोस्तों और पड़ोसियों के लिए तीसरा हिस्सा अपने घर और परिवार के लिए बकरीद इंसानियत,बराबरी,मदद और भाईचारे का पैग़ाम देने वाला त्योहार है,जो समाज में मोहब्बत और इंसानी हमदर्दी को मजबूत करता है।

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