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श्री नीम करौली बाबा स्थापना दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य प्रवाह –श्रद्धालुओं ने लिया आध्यात्मिक रस का अनुभव

Updated on: 27 October, 2026
श्री नीम करौली बाबा स्थापना दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य प्रवाह –श्रद्धालुओं ने लिया आध्यात्मिक रस का अनुभव

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी। श्री सनातन जागृति शक्तिपीठ ट्रस्ट के तत्वावधान में,श्री शक्तिपीठ पीठाधीश्वरी धाम बाबा नीम करौली आश्रम,बरईपुर सारनाथ,वाराणसी में श्री नीम करौली बाबा के पांचवें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिन अत्यंत भावपूर्ण और ज्ञानवर्धक रहा।कथा व्यास पूज्य पं. श्री आलोक कृष्ण जी महाराज ने श्रद्धालु श्रोताओं को स्वायम्भु मनु एवं महारानी शतरूपा के पुत्र उत्तानपाद की दोनों पत्नियों—महारानी सुनीति एवं महारानी सुरुचि—के चरित्र का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जहां सुनीति सुसंस्कार,सदाचार और सुंदर नीति का प्रतीक थीं,वहीं सुरुचि अहंकार और स्वेच्छाचारिता का उदाहरण थीं।महाराज जी ने आगे बताया कि सुरुचि के कठोर वचनों से आहत होकर बालक ध्रुव ने अपनी माता की आज्ञा एवं देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में वन जाकर कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें अद्वितीय वरदान प्रदान किया। ध्रुव ने 36 हजार वर्षों तक पृथ्वी पर राज्य करने के पश्चात ध्रुवलोक को प्राप्त किया। इस प्रसंग के माध्यम से महाराज जी ने संदेश दिया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सुंदर नीति,दृढ़ संकल्प और सुसंस्कार अत्यंत आवश्यक हैं—“उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी” अर्थात परिश्रमी और साहसी व्यक्ति के पास ही लक्ष्मी स्वयं आती हैं। कथा के क्रम में महाराज पृथु के आदर्श शासन,प्राचीन बर्हि द्वारा किए गए यज्ञों में पशु बलि के विरोध तथा देवर्षि नारद के माध्यम से “अहिंसा परमो धर्मः” के उपदेश का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। साथ ही पुरंजनोपाख्यान के माध्यम से जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल भाषा में समझाया गया। कार्यक्रम में राजा नाभि,भगवान ऋषभदेव एवं महाराज भरत के पावन चरित्रों का भी अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य व्याख्यान प्रस्तुत किया गया,जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा का श्रवण किया और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हुए। पूरा वातावरण भक्ति,श्रद्धा और ज्ञान के दिव्य संगम से आलोकित रहा।

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