पंजीकृतUDYAM-UP-75-0003230 | वाराणसी
Purvanchal Express News
संपर्क करें:
purvanchalexpressn@gmail.com
UDYAM-UP-75-0003230

फल विक्रेता की बेटी ने बढ़ाया परिवार का मान वीएचयू स्नातक में हासिल किया मेडल

03 July, 2026  |  10:10 PM
फल विक्रेता की बेटी ने बढ़ाया परिवार का मान वीएचयू स्नातक में हासिल किया मेडल

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

अतुल राय 

 

वाराणसी। जिंदगी में कठिनाइयां,मुश्कीले,चुनौतियां आती रहती है लेकिन इस पर जिसने संघर्षो के बाद विजय हासिल कर ली वह जीवन के हर ऊंचाइयों को हासिल कर सकती है। इस दुनियाँ में चेंजमेकरो चाहे मदर टेरेसा ,नीरू यादव ,सुधा वर्गीस के हौसले को देखा जाय जिसे पूरा विश्व सराह कर उनके संघर्षो को गौरवान्वित किया और उस पथ पर चलने की राह तलाश ली। गरीब,अमीर के घर ही हर इंसान पैदा होता है जो अपने हौसले के बल पर कुछ नया बन दिखाता है। वैसे धारा के साथ बहना आसान है लेकिन धारा के विपरीत चलने में आने वाली कठिनाइयों को जिसने पतवार बना लिया वह सफल रहा।शायद इसी कड़ी में 

वाराणसी शहर से 25 किमी दूर छोटे से गांव परसीपुर की एक साधारण से परिवार में जन्मी अंतिमा सोनकर पहले बचपन मे एक नर्सरी स्कूल की छात्रा रही। उसने गुरुओं के आज्ञाओं का पालन और जेहन में मेहनत के साथ स्वीकारा और अच्छे अंको से पढ़ाई कर जब बीएचयू में स्नातक की डिग्री प्राप्त की तो खुशी का ठिकाना न रहा।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने अपना 104 दीक्षांत समारोह मनाया जिसमें मेधावियों को मेडल देकर सम्मानित किया।उसी में परसीपुर की रहने वाली फल विक्रेता राजेश सोनकर की छोटी पुत्री अन्तिमा सोनकर ने जियोफिजिक्स से बैचलर डिग्री में मेधावी चुनी गई। और जब सम्मानित किया जा रहा था तब अपने अपने नर्सरी स्कूल के गुरुओं और उनके आदर्शों की याद ने उसे भाव विभोर कर दिया।बताते चले दादा रामनाथ सोनकर व पिता राजेश सोनकर रामेश्वर बाजार में वर्षों से ठेले पर फल की दुकान लगाते हैं,इसी से परिवार और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। राजेश ने कहा था कि कमाकर परिवार तो चलाता रहूँगा लेकिन बेटे -बेटियों में कोई फर्क न रखते हुए दो जून की रोटी से काट कपटकर बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में पीछे नहीं रहूँगा।आज उनके भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब बिटिया के सिर पर ताज और हाथों में डिग्री देखी।बच्चों के गुरु से मिलकर कहा कि आपका शिक्षा के साथ संस्कार पुत्री को ऊंचाइयां दिलाई है।आज पुरस्कार लेकर घर पहुंचने पर परिवार और गांव में खुशी का माहौल रहा।अन्तिमा ने कहा की ये बचपन के गुरुजनों का आशीर्वाद रहा जो सफलता उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम बन गया। उन्होंने अपने गुरु और माता-पिता का आभार व्यक्त किया,जिन्होंने उनका भरपूर समर्थन किया। अंतिमा का सपना भूगर्भ वैज्ञानिक बनकर विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देना है।

© 2026 Purvanchal Express News. All Rights Reserved. (UDYAM-UP-75-0003230)