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फर्जी सीबीआई आफिसर बनकर साइबर फ्राड करने वाले गिरोह का साइबर पुलिस ने किया पर्दाफाश

03 July, 2026  |  10:06 PM
फर्जी सीबीआई आफिसर बनकर साइबर फ्राड करने वाले गिरोह का साइबर पुलिस ने किया पर्दाफाश

संवाददाता पूर्वांचल एक्सप्रेस न्यूज़

 

वाराणसी -- माधव नगर कालोनी सारनाथ निवासी वादी अनुज कुमार यादव के साथ 98 लाख रुपए की हुई ठगी होने पर 04.12.24 को दी गयी तहरीर को गम्भीरता से लेते हुए घटना की विवेचना प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना विजय नारायण मिश्र को सौंपा गया।फ्राड में संलिप्त अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु डीसीपी क्राइम प्रमोद कुमार व एडीसीपी श्रुति श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा एसीपी गौरव कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम द्वारा घटना में संलिप्त सरगना सहित आठ अभियुक्तों को भिन्न-भिन्न स्थानों से गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड , फर्जी आधार कार्ड, लेपटॉप, टेबलेट सहित 7,51,860/रुपए बरामद किया गया। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के नाम क्रमशः पहले का संदीप कुमार पुत्र एस करन लाल निवासी गौशाला पुरवा थाना रामकोटी सीतापुर, दूसरे का अभिषेक जायसवाल पुत्र कृष्ण जनम जायसवाल निवासी चकिया चन्दौली, तीसरे का विकास सिंह पटेल पुत्र दिनेश कुमार सिंह पटेल निवासी हातीपुर थाना चुनार मिर्ज़ापुर, चौथे का कुनाल सिंह पटेल पुत्र शिवशंकर निवासी मगरहा थाना चुनार मिर्ज़ापुर,पांचवें का संजय यादव पुत्र स्व.चन्द्रदेव यादव निवासी ग्राम लालपुर पोस्ट जलालपुर जौनपुर,छठवें का हर्ष सिंह पुत्र स्व.अनुराग मिश्रा निवासी ग्राम फुलहा थाना रामगढ़ चुनार मिर्ज़ापुर,सातवें का नितिन सिंह पुत्र राजकुमार सिंह निवासी ग्राम व पोस्ट खानपुर थाना चुनार मिर्ज़ापुर,आठवें का इकबाल खान पुत्र स्व.जलील अहमद निवासी कबीर नगर कालोनी दुर्गा कुण्ड वाराणसी व मो0 आदिल खान पुत्र नजीरूद्दीन खान निवासी बेलबीर पोस्ट व थाना चुनार मिर्ज़ापुर बताया गया।सभी अभियुक्तों को शुक्रवार को मीडिया के सामने पेश करते हुए डीसीपी क्राइम प्रमोद कुमार ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को उनके मोबाइल नंबर पर वर्चुअल नंबर से कॉल कर उनके नाम पर फर्जी सिम के जारी होने तथा उसे सिम का अवैध गतिविधियों में लिप्त होने का झांसा देते हुए उनकी डिजिटल हाउस अरेस्टिंग कर वेरिफिकेशन के नाम पर तथा कथित आरबीआई के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर कर लिया जाता है।उन पैसों को साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी गेमिंग एप्लीकेशन में यूजर्स को पे आउट के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस तकनीकी में साइबर अपराधियों द्वारा ईसीएस व ईआईपी सर्विसेज का इस्तेमाल करते हुए ओटीपी प्राप्त करने के लिए एसएमएस फॉरवर्डर एप्लीकेशन जैसे ड्रैगन व एसएमएस आदि का प्रयोग किया जाता है तथा अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से इस तरह की घटना में फर्जी म्यूल खातों,फर्जी सिम कार्ड व डिजिटल फुटप्रिंट से बचने के लिए वर्चुअल मशीन का प्रयोग किया जाता है। पुलिस ने सभी अभियुक्तों को भा0द0वि0 की धारा 308(2),318(2), 318(4), 338,336(3),340(2) बीएनएस व 66आईटी एक्ट के अन्तर्गत मुकदमा पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही करते हुए जेल भेजा गया। पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक साइबर थाना विजय नारायण मिश्र,नि0 राजकिशोर पाण्डेय,नि0 विपिन कुमार,नि0 विजय यादव,उ0 नि0 संजीव कन्नौजिया, उ0नि0 सतीश सिंह, उ0नि0 शैलेन्द्र कुमार, उ0नि0 आलोक रंजन सिंह,हे0का0 क0आ0 श्याम लाल गुप्ता, हे0का0 गोपाल चौहान,का0 चंद्रशेखर यादव, अनिल यादव, अवनीश सिंह, दिलीप कुमार, मनीष कुमार सिंह, अंकित प्रजापति, सूर्यभान सिंह, पृथ्वीराज सिंह, अनिल कुमार मौर्य, पुनीता यादव, प्रीति सिंह, संगीता यादव, विजय कुमार आदि शामिल रहे 

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