पंजीकृतUDYAM-UP-75-0003230 | वाराणसी
Purvanchal Express News
संपर्क करें:
purvanchalexpressn@gmail.com
UDYAM-UP-75-0003230

86 वा धूमिल जयंती-- धूमिल की रचनाएं जनतंत्र के लिए जागरण का माध्यम है

Updated on: 28 October, 2026
86 वा धूमिल जयंती-- धूमिल की रचनाएं जनतंत्र के लिए जागरण का माध्यम है

विनोद यती की खास रिपोर्ट
 

वाराणसी

रामेश्वर। धूमिल लोकतंत्र के बदलते समय के सजग प्रहरी रहे। उन्होंने अपने कविताओं के द्वारा एक दूसरे प्रजातन्त्र की तलाश में अपनी कविता को आम जन की आवाज में प्रकट करते रहे। धूमिल ऐसे पहले कवि हैं जिन्होंने हिंदी में अपने नए मुहावरे गढ़े हैं।हिंदी साहित्य के क्रम में कबीर-निराला,मुक्तिबोध और धूमिल को रखा जा सकता है।86 वी धूमिल जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि" प्रो0 सुरेंद्र प्रताप सिंह पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग काशी विद्यापीठ ने व्यक्त की।विशिष्ट अतिथि योगेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि गांव की असली संस्कृति धूमिल की कविताओं में दिखती है। धूमिल का काल विचार के संघर्षो का काल था। मुख्य वक्ता प्रो0 गोरख पांडेय  हिंदी विभाग उदय प्रताप कालेज ने कहा कि आम आदमी की आवाज को पहचाने की क्षमता धूमिल की कविता में दिखती है।  धूमिल की रचनाएं जनतंत्र के लिए जागरण का माध्यम है। विशिष्ट वक्ता प्रो0 रामप्रकाश कुशवाहा  पूर्व प्रधानाचार्य राजकीय महाविद्यालय बलिया ने कहा कि धूमिल ने पीछे नहीं बल्कि शोषण,अत्याचार को कविता द्वारा नया रास्ता व तेवर दिखाया है।कवि शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि हिंदी कविता के क्षेत्र में धूमिल की कविताएं प्रखर हैं।
 अन्य प्रमुख वक्ताओं में गणेश प्रसाद सिंह,दीपक शर्मा,केशव शरण,विपिन कुमार सिंह,डॉ0 चंचल सिंह,डॉ0 प्रभाकर सिंह,डॉ0 आर के सिंह,कमलेश वर्मा 
 ने कविता पाठ किया।धूमिल समाज मे शोषण के विरोध में कविताएं लिखकर प्रेरणा पुरुष बन गए।आयुष एवम खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री डॉ0 दयाशंकर मिश्र "दयालु" ने कहा कि जनचेतना और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने वाले कवि धूमिल को आगे बढ़ाने का दायित्व जनप्रतिनिधियों के साथ आमजन की है। इनके गौरव,सम्मान के लिए गाँव की मिट्टी से सनी असली लोकतंत्र की आजादी धूमिल को याद करने के लिए एक दिन नहीं हर पर्व पर गोष्ठियों के जरिये याद किये जाने की जरूरत है। मेरी सच्ची श्रद्धांजलि है और गांव में धूमिल जी के नाम पर कुछ नया करने व बनवाने का आश्वासन दिया।भतसार स्कूल के प्रतिभावान बच्चों का सम्मान करते हुए पुरस्कार प्रदान किया गया। युवाओ ने बालिका सम्मान व पर्यावरण पर पर्यावरण प्रेमी मनीष पटेल के नेतृत्व में रैली निकाली गई।अध्यक्षता करते हुए डॉ0 सदानन्द सिंह ने कहा कि धूमिल वर्तमान परिस्थितियों में समयानुसार अपने तेवर और प्रेम भरी गुर्राहट की कविताओं को लिखा करते थे। जनकवि धूमिल के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूलाधार उनके गांव खेवली की माटी है। उन्होंने यह भी कहा कि पांडेयपुर व खेवली एक ही पन्ने के दो पृष्ठ हैं इन्ही दोनों पृष्ठों पर धूमिल का सम्पूर्ण साहित्य खड़ा होकर,ललकारते हुए तत्कालीन संसद से सवाल पूछते हैं। धूमिल के ज्येष्ठ पुत्र ने कहा कि -एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है,न रोटी खाता है वह सिर्फ रोटी से खेलता है। मैं पूछता हूँ वह तीसरा आदमी कौन है मेरे देश की संसद मौन है।अहम सवाल रोटी पर संसद किस तरह मौन रहती है इसे धूमिल ने अपनी कविताओं में बड़ी बेवाकी से लिखा है। डॉ0 प्रभाकर सिंह ने नदियों की दशा दिशा तो देवी शंकर सिंह ने कहा कि धूमिल आदमी को आदमी के षड्यंत्र के खिलाफ बराबर सावधान करती रही।कई प्रखर वक्ताओं ने कहा कि धूमिल अपने समय के सर्वाधिक जाग्रत और जीवंत कवि थे उन्होंने हिंदी कविताओं को नए मुहावरे और नए सन्दर्भ देकर कविता को आमजन तक पहुंचाया।धूमिल ने अपनी बात रखने के लिए कविता को माध्यम बनाया ।वे जनवादी तेवर वाले महापुरुष रहे। धूमिल जयंती का शुभारंभ उनकी पत्नी मुरता देवी तथा आगन्तुक साहित्यकारों,कवियों,रचनाकारों व समाजसेवियों द्वारा तैल चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।
आये हुए साहित्यकारों,कवियों,रचनाकारों के प्रति धूमिल के पुत्र रत्नशंकर पांडेय,आनन्द शंकर पांडेय व अशोक पांडेय धन्यवाद सहित स्वागत कर आभार प्रकट किया।संचालन डॉ0 प्रभाकर सिंह ने किया।
 

© 2026 Purvanchal Express News. All Rights Reserved. (UDYAM-UP-75-0003230)