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श्रद्धा के साथ मनी प्रबोधिनी एकादशी

Updated on: 27 October, 2026
श्रद्धा के साथ मनी प्रबोधिनी एकादशी

विवेक राय की खास रिपोर्ट

*तुलसी विवाह पर महिलाओं ने गाया मंगलगीत।

वाराणसी-  हिन्दू धर्म पर्वों व त्योहारों एवम आध्यात्मिक परम्पराओ से भरा हुआ है।जहां तरह -तरह के पर्वो का विधान एवम महत्व है।उसी तरह कार्तिक मास में तुलसी पूजन व देवदीप(आकाश दीप)का महत्व है। इस दिन गांव के घरों-घरों में लड़कियां एवम जागृत महिलाओं द्वारा प्रातः एवम शाम में तुलसी जी का पूजन श्रद्धा व विश्वास से किया जाता है।गन्ना व ताजे गुड़ का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है।प्रबोधिनी एकादशी पर रामेश्वर -हरहुआ ग्रामीण अंचल में शुक्रवार को महिलाओं ने तुलसी विवाह की परंपरा निभाई व मंगलगीत गाकर पूजन -अर्चन किया।युवतियों ने द्वारचार की रस्म के साथ तुलसी की पूजा की।रामेष्वर मन्दिर के पुजारी
आचार्य प0 अन्नू तिवारी ने तुलसी विवाह के महत्व बताया और कथा सुनाई। बताया कि  आज रात में श्री हरि विष्णु का पूजन कर उन्हें जगाया जाएगा।चतुर्मास की समाप्ति पर तुलसी शालिग्राम का विवाहोत्सव मनाया जाता है।ग्रामीण क्षेत्र में तुलसी पूजन के लिए जगह-जगह मंडप बनाये गए थे। शिव प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु का विवाह हर घर व आंगन में हुआ। तुलसी व केला बृक्ष को प्रतीक मानकर महिलाओं व किशोरियों ने विधिवत पूजा की। क्षेत्र के रामेश्वर, बरेमा , जगापट्टी, पेडूका, खेवली, हरिहरपुर,परसीपुर, हिरमपुर ,चक्का आयर, मुर्दहा, औरा, करोमा ,कोइराजपुर, बेलवरिया, सरायकाजी ,अनौरा ,भटौली में तुलसी पूजन धूमधाम से सम्पन्न हुआ। राजेश्वरी बालिका इंटर कालेज में प्रबोधिनी एकादशी पर छात्राओं को स्वच्छ वातावरण व तुलसी का महत्व बताया गया। प्रबंधक कौशलेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि सामाजिक रीति रिवाजों व परम्पराओ को जीवंत रखने की जिम्मेदारी कल की नारी छात्राओं पर भी है।

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