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धनतेरस : पूजे गये धन के देवता कुबेर बाजारों में लौटी रौनक, खूब बिके गहने और बर्तन

Updated on: 28 October, 2026
धनतेरस : पूजे गये धन के देवता कुबेर बाजारों में लौटी रौनक, खूब बिके गहने और बर्तन

रजनी सोनी की खास रिपोर्ट
जौनपुर। पौराणिक कथाओं के अनुसार धनतेरस और दीपावली का महत्व आदिकाल से चला आ रहा है। विजय प्राप्ति के बाद प्राय: दीप जलाये जाते थे जो दीपावली का ही प्रतीक रहा। दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस के रूप में भगवान कुबेर की पूजा करके धन, समृद्धि की कामना की जाती है। लोक परम्परानुसार उक्त तिथि पर आभूषण से लेकर बर्तन और साफ-सफाई के लिए झाडू तक की खरीदारी होती है। शनिवार को जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीणांचल की बाजारों में भीड़ ज्यादा रही। गहने की दुकानों पर जहां खरीदारी जोरों पर हो रही थी वहीं बर्तनों की दुकानों पर भी विभिन्न प्रकार के बर्तन खरीदे गये। इसी के साथ-साथ धनरतेस का पर्व शनिवार को पडऩे के कारण वैदिक रीति-रिवाज से पूजा भी की जायेगी। ज्योतिषी पंडित कमलेश कुमार उपाध्याय के अनुसार शनिवार को धनतेरस होने के कारण यह तिथि अतिमहत्वपूर्ण है। धन पर शनि का प्रभाव न पड़े, इस उद्देश्य से भी अधिसंख्य हिंदू व्रत के साथ कुबेर और शनिदेव का पूजा अवश्य की जायेगी। धनतेरस और दीपावली की बात की जाये तो त्रेता युग में भगवान रामचन्द्र और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण सगे-संबंधियों के साथ दीपावली पर्व पर भगवान कुबेर का पूजा-पाठ किये थे। किदवंती के अनुसार समाज का हर वर्ग छोटा हो या बड़ा, गरीब या अमीर धन प्राप्ति के लिये इस तिथि पर अपनी हैसियत के हिसाब से पूजा-पाठ कर दान-दक्षिणा तक देते हैं। शनिवार को प्रात: काल से खरीदारी का जो सिलसिला शुरू हुआ वह देर शाम तक चलता रहा। इसी तरह जिले की अन्य तहसील मुख्यालयों पर बड़ी बाजारों में भी गहना, कपड़ा, बर्तन और मिठाई की खरीदारी जोरों पर होती रही। भक्त सुख, समृद्धि और धन के लिए धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। कई अन्य धार्मिक त्योहारों की तरह, धनतेरस भी कुछ लोकप्रिय हिंदू पौराणिक उपाख्यानों से जुड़ा है।      
धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू ?
इस बार धनतेरस का त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है। 22 अक्तूबर को शाम 6 बजे त्रयोदशी तिथि लग जाएगी और फिर प्रदोष काल मुहूर्त में पूजा और खरीदारी हो सकेगी। वहीं उदया तिथि के आधार पर 23 अक्तूबर 2022 धनतेरस मनाया जाएगा। धनतेरस पर सोने-चांदी के सिक्के और आभूषणों की खरीदारी की जाती है। इसके अलावा धनतेरस पर मां लक्ष्मी की सबसे प्रिय चीज झाड़ू भी खरीदी जाती है। माता लक्ष्मी को साफ-सफाई और सुंदरता बहुत ही प्रिय होती है। जहां साफ-सफाई और सजावट होती है वहां पर मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदी जाती है। वास्तुशास्त्र में झाड़ू को लक्ष्मीजी का प्रतीक माना गया है। इसलिए यदि झाड़ू को ठीक ढंग से न रखा जाए तो इसका दुष्प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है।

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