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*कथा व ब्यथा का एक साथ रहना सम्भव नहीं* 

03 July, 2026  |  02:44 AM
*कथा व ब्यथा का एक साथ रहना सम्भव नहीं* 

विवेक राय की खास रिपोर्ट

 

चौबेपुर- जिसके जीवन में श्रीराम कथा प्रवेश कर गयी उसके जीवन की ब्यथा समाप्त हो जाती है क्योंकि कभी भी कथा व ब्यथा दोनों एक साथ नहीं रह सकते।ऐसे में आप सभी प्रभु श्रीराम कथा को अपने जीवन में धारण करके अपने जीवन को धन्य करें।उक्त विचार मानस कोकिला आराधना देवी ने रविवार को सुंगुलपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा में कथा श्रोताओं के बीच ब्यक्त किया।मानस कोकिला ने कहा कि आज जहां एक ओर भले ही युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता की ओर बढ़ रही है तो वहीं युवाओं का एक ऐसा वर्ग भी है जिनके चरण संसार से हटकर अध्यात्म की ओर लगातार बढ़ रहे हैं जो कि बदलते भारत के लिए शुभ सकेत हैं।श्रीराम कथा में क्षेत्र के दर्जनों गांवों के कथा श्रोताओं ने श्रीराम कथा रूपी गंगा में गोता लगाया।इस दौरान आचार्य राममिलन महाराज सुप्रसिद्ध कथा वाचक व मानस किंकर शशिकांत महाराज,रविकांत महाराज,अनुपमा ,वीरेंद्र मोहन चौबे,अरूण चौबे,मनीष चौहान,ओम प्रकाश चौबे,संतोष चौबे सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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